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मानसून के चलते सब्जियों के दामों में लगी आग

भारत के उत्तर-पूर्वी से लेकर भारत के लगभग सभी इलाकों में एक सप्ताह से हो रही निरंतर बारिश के बाद सब्जियों के भावों में तो जैसे उबाल सा आ गया हो। बारिश से सब्जियों के खराब होने के कारण मंडियों में सब्जी नहीं आ रही है। जिससे  मांग ज्यादा होने और सब्जियों की आवक कम होने के कारण सब्जियां महंगी हो गई हैं और दुकानदार द्वारा ग्राहकों से  मनमर्जी के दाम वसूले जा रहे हैं। मंडियों में सब्जियों के दाम बढ़ने से लोगों की रसोई का बजट बिगड़ा हुआ है। जिससे की ग्राहकों का जेब भारी होता चला जा रहा है.

मंडियों में सब्जियों के दाम बढ़ने के चलते हालात यह हो गए हैं कि लोग मंडी में सब्जी लेने तो जाते हैं लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा कि सब्जियां क्या खरीदें  और क्या न खरीदें । आम आदमी की परेशानी इस कदर बढ़ गयी  है कि उन्हें मंडियों में  सब्जियां  अधिक  दामो में भी मिल रही है और उसके बाद ताजी भी नहीं मिल रही है। मंडी में आने वाले हर व्यक्ति की नजरें ताजी सब्जियां तलाश रही हैं। इस समय मंडियों में बढे  हुये  सब्जियों के दामों की  सबसे बड़ी वजह बारिश को माना जा रहा है जबकि इसकी बड़ी वजह कालाबाजारी और दुकानदारों के मनमर्जी से रेट वसूलना तथा मंडी बोर्ड की वैबसाइट पर रेटों के बारे में जानकारी न होना है।

जालंधर में यह रहे थोक व रिटेल सब्जियों के भाव

सब्जी  थोक रिटेल
टमाटर 12-13 20-40
आलू 09-14 20-25
प्याज 16-20 20-25
लौकी 12-15 60-70
घीया 10-15 60-80
खीरा 20-25 35-40
भिंडी 20-25 40-50
बैंगन 20-25 25-30
गोभी 20-40 30-55
अरबी 20-25 25-30
बंदगोभी 05-10 10-15

सितम्बर माह में सस्ती होंगी सब्जियां

जब हमने मंडियों में कुछ दूकानदारों से बात की तो दुकानदार ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र जहाँ से सब्जियों की आवक सबसे ज्यादा होती है में लगातार लैंड स्लाइड व बारिश के कारण रास्ते बंद हैं। ऐसे में मंडी में आने वाली सब्जियों की आवक प्रभावित हो रही है। बारिश के कुछ हद तक थमने के साथ ही सब्जियां एक बार फिर सस्ती हो जाएंगी। वहीं सितम्बर के पहले हफ्ते के बाद सब्जियां सस्ती होने की उम्मीद है। यहां लोकल सब्जियों में अभी पौध लगाई जा रही है जबकि सर्दियों में लगाई गई सब्जियां बारिश के साथ ही खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में महंगाई बढ़ी है।

 

भंडारण के अभाव से सड़ीं लगभग 12,000 क्विंटल सब्जियां

जानकारी के अनुसार जालंधर के सीकर  की मंडियों  में भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से गत माह लगभग 12,000 क्विंटल सब्जियां सड़ गईं। जानकारों के अनुसार अगर भंडारण व्यवस्था सही तरीके की होती जिससे की सब्जियों को सड़ने से बचाया जा सके तो सीकर शहर को लगभग 40 दिन तक आसानी से सस्ती सब्जी मिल जाती। उचित भंडारण के अभाव में सब्जियां नष्ट होते ही महज 10 दिन में ही सब्जियों के थोक एवं खुदरा भाव 5 से 7 गुणा तक बढ़ोतरी देखने को मिली है । जो सब्जी मई के महीने  में थोक भाव में मात्र 10 रुपए किलो मिलती थी वही अब 70 रुपए किलो में मिल रही है।

 

कैमीकल भी हैं कारण

सब्जियों और फलों को जल्दी पकाने के चक्कर में दुकानदार फलों और सब्जियों पर कैमीकल का प्रयोग कर रहे हैं जिस कारण कैमीकल युक्त फल और सब्जियां जल्दी खराब हो जाते हैं। यह फल और सब्जियां जहां लोगों की जेबों को काट रही हैं वहीं उनके स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ कर रही हैं। गत दिवस होशियारपुर मंडी अफसर तेजेंद्र सिंह द्वारा गढ़शंकर व माहिलपुर की सब्जी मंडियों में चैकिंग दौरान आम के के्रट में से चाइनीज कैल्शियम कार्बाइड की पुड़िया प्राप्त हुई जिस दौरान मौके पर ही उन्होंने 180 किलो आम व 2 क्विंटल के लगभग गोभी व पत्ता गोभी नष्ट करवाई गई तथा कम्पनी को जुर्माना भी किया गया।

कालाबाजारी  के चलते भी बढ़ रहे हैं सब्जियों के दाम

भारत में लगभग एक सप्ताह से हो रही निरंतर बारिश को ही हम सब्जियों के भाव में आ रहे उछाल का मुख्य कारण नहीं बता सकते है ।  बल्कि इसके अतिरिक्त भी सब्जियों में आये एकदम से बदलाब का कारण भी है जो की सब्जियों की कालबाजारी है जिससे की मंडियों में थोक विक्रेता द्वारा सब्जियों का पहले से ही स्टॉक कर लिया जाता है फिर उसे सब्जियों के रेट बढ़ने के साथ या उसकी आवक काम होने पर और अधिक रेट पर ग्राहकों को बेंचा जाता है ।