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कुछ ऐसा हैं गंभीर रोग एड्स का इतिहास, जानें विस्तार से

एड्स की खोज कब हुई थी इस बारे में तो हम पहले भी पढ़ चुके हैं. फिर भी यदि आप इस बात से अंजान है तो हम आपको इस बात से अवगत करवा दे कि इस गम्भीर बीमारी की खोज तो करीब 30 सालो पहले ही की जा चुकी थी, जिसके बाद से ही इस बीमारी को लेकर शोध होना शुरू हो गए. आज यदि आप किसी के सामने HIV या एड्स का नाम भी ले लें तो लोगों के मन में एक डर पैदा हो जाता है. डर पैदा होने का कारण भी लाजमी है क्योंकि HIV एक ऐसा अतिसूक्ष्म विषाणु हैं, जिसके कारण यह गम्भीर बीमारी होती है.

एड्स के कारण लोग इसलिए भी डरते हैं क्योंकि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है. लेकिन क्या आप यह बात जानते हैं कि एड्स कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक संलक्षण है जोकि हमारे शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता को जड़ से खत्म कर देता है. ऐसे में हमारा शरीर इस लायक ही नहीं बचता है कि वह किसी भी बीमारी का सामना कर पाए. ऐसे में मरीज की हालत काफी गम्भीर हो जाती है, मरीज का इलाज भी कठिन होता जाता है और उसकी मृत्यु तक भी हो सकती है. आज के समय में एड्स को सबसे गम्भीर बीमारी या महामारी कहना भी गलत नहीं होगा.

एड्स होने के तीन प्रमुख कारण होते हैं जोकि इस प्रकार हैं:-

1. असुरक्षित यौन संबंध

2. रक्त के आदान-प्रदान

3. माँ से शिशु को

कहाँ से हुई एड्स की शुरुआत : सबसे पहले 19वीं साड़ी की शुरुआत में एड्स का विषाणु अफ्रीका में एक खास प्रजाति के बंदर में मिला था. वहां के लोग बन्दर का मास खाते थे जिससे यह इंसानों में भी फ़ैल गया. सर्वप्रथम इंसानों में इसकी पहचान 1981 में की गई. तब यह देखा गया कि मरीज की रोगों से लड़ने कि क्षमता धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. ऐसे में यह देखने को मिला कि इस बीमारी का कोई इलाज तो नहीं है पर हां कुछ सावधानी बरतकर इससे बचा जरूर जा सकता है.

ऐसे में यह कहा गया कि अपने जीवन साथी के प्रति वफादार रहें तथा एक से अधिक व्यक्ति से यौन संबंध ना रखें. साथ ही यदि आप एक से अधिक व्यक्ति से यौन संबंध रखते हैं तो ध्यान रहे सदैव कंडोम का प्रयोग करें. इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि एड्स से संक्रमित रोगी के खून से अपने खून को किसी भी हालत में संपर्क में ना आने दें इससे आपका भी खून संक्रमित हो सकता है. एड्स एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज संभव नहीं है और ऐसे में यह समाज और आसपास के लोगों के मन में भय उत्पन्न कर सकता है. एड्स के रोगी के साथ अच्छा व्यवहार करें और उसे भी आम जिंदगी जीने का एक सुनहरा मौका दें.