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क्या आप जानते हैं एड्स की खोज कब हुई? भारत में एड्स का इतिहास?

एड्स को देश ही नहीं बल्कि दुनिया में भी एक गंभीर बीमारी के रूप में देखा जाता है. हो भी क्यों ना! आखिर एड्स है ही ऐसी बीमारी जिसके सामने आज साइंस भी घुटने टेक चूका है. एड्स को आज यदि हम दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती भी कहें तो कुछ गलत नहीं होगा. दुनियाभर में इस बीमारी को रोकने के लिए कई प्रयत्न किए जा रहे हैं लेकिन बावजूद इसके एड्स को लेकर जो जानकारियां सामने आती हैं वे चौंकाने वाली होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एड्स की खोज कब हुई? नहीं ! तो चलिए जानिए हमारे माध्यम से.

 

जैसे हाल ही में जो रिपोर्ट सामने आई है उसके अनुसार दुनियाभर में एड्स के मरीजों की संख्या में कमी के बजाय लगातार बढ़ोतरी हो रही है. बात भारत की करें तो देखने को मिला है कि हमारा देश HIV संक्रमित लोगों की लिस्ट में तीसरे स्थान पर पहुँच गया है. इस गम्भीर बीमारी को लेकर वैसे तो कई कयास लगे जाते हैं कि यह बीमारी कितनी पुरानी है, लेकिन आज हम जो जानकारी लेकर आए हैं वह आपके लिए नई हो सकती है.

भारत में एड्स का इतिहास

दरअसल आपको भी यह बात जानकर आश्चर्य होगा कि देश में HIV के लक्षणों को करीब 30 साल पहले ही देख लिया गया था. इस बारे में चेन्नई की डॉ. सुनीति सोलोमन का नाम सामने आया है, जिन्होंने HIV को लेकर एक रिसर्च को अंजाम दिया था जोकि देश के लिए एक वरदान से कम नहीं था.

 

बात तब की है जब डॉ. सुनीति 100 यौनकर्मियों को लेकर मद्रास मेडिकल कॉलेज की तरफ से एक शोध को अंजाम दे रही थीं. तभी उन्होंने पाया कि यहाँ 100 में से 6 लोग इस बीमारी का शिकार थे. उन्होंने इस बारे में सरकार को बताया लेकिन उनकी बात को नहीं माना गया, जिसके बाद उन्होंने अपना रुख अमेरिका को किया और अपनी जाँच के नमूने वहां भेजे. हालाँकि इस जाँच के बाद उन्हें काफी विरोधों का सामना भी करना पड़ा.

 

उन्होंने हार ना मानते हुए वर्ष 1993 में चेन्नई में एक फाउंडेशन ‘वाई आर गायतोंडे केयर फाउंडेशन’ की स्थापना को स्थापित किया और अपनी रिसर्च पर काम जारी रखा. उन्हीं की इस मेहनत के चलते भारत को एड्स जैसी गम्भीर बीमारी की दिशा में कुछ हद तक कामयाबी मिली.