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गुजरात के ऐसे गाँव जहाँ भगवान नहीं, बल्कि पूजे जाते हैं शेर, मोर और सांप

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गुजरात देश के विकसित और सबसे डेवलप शहरो में से एक माना जाता रहा हैं, जहाँ बड़े बड़े उद्द्योगीक कारखाने हैं. और जहाँ का अधिकतर तपका व्यापारिक वर्ग में आता हैं. लेकिन आज हम गुजरात के एक ऐसे जिले के बारे में बात कर रहे हैं जो कि 72 प्रतिशत आदिवासी बहुल जिला माना जाता हैं. हम बात कर रहे हैं गुजरात के जिले डांग की बात कर रहे हैं. इस जिले के कई छोटे छोटे गाँव हैं जहाँ पर जानवरों की मूर्ति की पूजा की जाती हैं. यह अपने आप में काफी अनोखी बात हैं. आइये जानते हैं क्या है खास.

 

जानवरों की प्रतिमाये पूजी जाती हैं

हम आपको आज गुजरात के जिले डांग की बात कर रहे जहाँ के कुछ गाँवो में जानवरों की प्रतिमाओ की पूजा की जाती है. आपको बता ते कि आप जब इन गाँवो में प्रवेश करते हैं तो गाँवो के मुहानों पर आपको शेर, सांप और मोर की प्रतिमाये देखने को मिलेगी. और गाँवो के लोग इन्ही जानवरों की प्रतिमाओं की पूजा करते हैं, यह काफी पुरानी प्रथा हैं. ऐसा नहीं है कि इन गाँवो के लोग भगवान् को नहीं मानते, बल्कि ये लोग पशु, और पक्षियों का भी सम्मान करते हैं.

 

आदिवासी बहुल जिला हैं डांग

आपको बता दे कि डांग जिला आदिवासी बहुल जिला हैं, जहाँ 72 प्रतिशत लोग आदिवासी हैं. अगर बात करे इसके क्षेत्रफल की तो 1764 वर्ग किमी तक फैले क्षेत्र में 2,26,769 जनसंख्या हैं. यह एक पर्वतीय क्षेत्र हैं इसी कारण यहाँ पर रागी और धान की खेती अधिक मात्रा में की जाती हैं. यहाँ पर अधिक मात्रा में लोग कृषक हैं. आपको बता दे कि इस जिले का मुख्यालय  आहवा है.

 

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