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मुगल-ए-आजम को बनने में लगे थे 17 साल, कुछ ऐसी थी निर्देशक की सनक, जानिए पूरी कहानी

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हिंदी सिने इतिहास की सबसे शानदार फिल्मो में से एक मानी जाने वाली मुगल-ए-आजम अपने जमाने की सबसे महंगी फिल्म थी. फिल्म को लेकर निर्देशक की सनक कुछ इस तरह थी की उन्होंने अपने जीवन में केवल 3 ही फिल्मो का निर्देशन किया के. आसिफ ने. इस फिल्म को बनाने के लिए जहाँ पैसो को पानी की तरह बहाया गया वहीं फिल्म को बनने में पुरे 17 साल का समय लगा. आखिर ऐसा क्या था जो इस फिल्म ने इतना समय लिया. आइये जानते हैं इस फिल्म से जुडी कुछ अनोखी और अनसुनी बाते.

 

17 साल में बनी फिल्म मुगल-ए-आजम

पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार और मधुबाला जैसे सितारों से सजी इस फिल्म में बादशाह अकबर के बेटे सलीम और अनारकली के बिच की प्रेम कहानी को दिखाया गया. जहाँ अनारकली महल की एक कनीज हैं वहीं वहीं सलीम एक राजकुमार, ऐसे में अनारकली से प्यार करने वाले सलीम अपने पिता से बगावत कर देते हैं. आपको बता दे कि यह फिल्म 17 सालो में बनकर तैयार हो सकी. इसके पीछे का कारण इसकी स्टारकास्ट रही. पहले यह फिल्म 1940 में रिलीज होने वाली थी जिसमें सप्रू चंद्रमोहन और नरगिस ने मुख्य भूमिका निभाई थी. लेकिन बाद में इस फिल्म को नई स्टारकास्ट के साथ में रिलीज किया गया, ऐसे में इस फिल्म को बनकर तैयार होने में पूरे 17 साल लग गए.

 

अपने ज़माने की महंगी फिल्मो में शुमार है मुगल-ए-आजम

मुगल-ए-आजम अपने ज़माने की सबसे महंगी फिल्मो में शुमार हैं, जहाँ इस फिल्म को बनाने के लिए निर्देशक ने अपने 17 साल लगाए वहीं इस फिल्म को बानने में काफी पैसा लगा. गौरतलब है की इस फिल्म के गाने प्यार किया तो डरना क्या को फिल्माने में 10 करोड़ रूपए लगे थे. वहीं फिल्म के एक गाने के लिए निर्देशक ने उस्ताद बड़े गुलाम अली खां साहब को उस समय 25000 रुपए मेहनताने के रूप में दिए थे, जबकि उस समय मोहम्मद रफी  को मेहनताना 300 रूपए दिया गया था. वहीं फिल्म के युद्ध सीन्स के लिए  2000 ऊंट और 4000 घोड़ों का इस्तेमाल किया गया था.

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