प्रहलाद को मारना चाहती थी होलिका, तो फिर क्यों होती है उनकी पूजा, जानिए कारण

मार्च के शुरूआती दिन देश भर में होलिका दहन का त्यौहार मनाया जाएगा, वहीँ 2 मार्च 2018 को होली खेली जाएगी. रंगो का त्यौहार होली देश सहित दुनिया के कई हिस्सों में मनाया जाता है. होली के दिन लोग आपसी मतभेद भूलकर एक-दूसरे को गले लगाते है. भाईचारे का यह त्यौहार क्यों मनाया जाता है यह तो आप सभी जानते ही है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि होलिका की पूजा क्यों की जाती है? क्या आप जानते है कि जिस होलिका ने प्रहलाद जैसे प्रभु भक्त को जलाने का प्रयास किया उसको क्यों पूजा जाता है?

दरअसल होलिका की पूजा के पीछे एक बड़ी वजह है. हुआ यह था कि जिस दिन होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठने वाली थी, उस दिन नगर में रहने वाले सभी लोगों ने अपने-अपने घरों में अग्नि प्रज्वलित कर प्रहलाद की रक्षा करने के लिए अग्नि देव से प्रार्थना की. प्रह्लाद को लोग क्यों इतना पसंद करते थे, उसके बारे में तो हमने बचपन से पड़ा ही है.

जैसे ही होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठी अग्नि देव ने लोगों की प्रार्थना स्वीकार की और फलस्वरूप होलिका नष्ट हो गई और अग्नि की कसौटी में से पार उतरा हुआ प्रहलाद नरश्रेष्ठ बन गया. प्रह्लाद को बचाने के लिए उस दिन घर-घर में अग्नि पूजा की गई थी, जिसने समय के साथ-साथ सामुदायिक पूजा का रूप लिया और उससे ही गली-गली में होलिका की पूजा प्रारंभ हुई.

होली के दूसरे दिन धन-धान्य की देवी संपदाजी की पूजा की जाती है. इस दिन महिलाएं देवी संपदाजी का डोरा बांधकर व्रत करती है और देवी संपदाजी की कथा सुनती है. व्रत को मिठाई खाकर खोला जाता है. हाथ में बँधे डोरे को वैशाख माह में किसी भी शुभ दिन शुभ घड़ी में खोल दिया जाता है. यह डोरा खोलते समय भी व्रत रखकर कथा कही-सुनी जाती है.

देवी संपदाजी की पूजा करने के लिए सबसे पहले पूजा की थाली में सारी पूजन सामग्री सजा लें, उसके बाद संपदा देवी का डोरा लेकर इसमें सोलह गठानें लगाएँ. बता दे कि यह डोरा सोलह तार के सूत का बना होता है तथा इसमें सोलह गठानें भी लगाने का विधान है. इसके बाद डोरे को हल्दी में रंग लें और फिर चौकी पर रोली-चावल के साथ कलश स्थापित कर उस पर डोरा बाँध दें. इसके बाद कथा कहें-सुनें. कथा के पश्चात संपदा देवी का पूजन करें. इसके बाद संपदा देवी का डोरा धारण करें. पूजन के बाद सूर्य के अर्घ्य दें.

mohit sharma