आखिर क्या है यह डर?

डर खुद में है पूरा वाक्य है. इसके बारे में और कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है. अगर आप किसी इंसान से डर के बारे में बात करते हैं तो सबसे पहले उसे अपना डर याद आएगा.

 

कौन कौन से डर

बच्चों को स्कूल जाने का डर, बड़े बच्चों को एग्जाम का डर, खिलाड़ी को सही ना खेलने का डर, युवाओं को नौकरी ना लगने का डर, नौकरी लग गई है उनको टारगेट पूरा ना होने का डर.

 

आखिर यह डर है क्या

जी हाँ आखिर यह डर है क्या? क्या कभी सोचा है इसके बारे में. अगर कभी ध्यान नहीं दिया है, तो आज जो अभी तक हुआ नहीं उस बात से हम डर रहे हैं. एग्जाम हुआ ही नहीं कि रिजल्ट का डर, पढाई पूरी की नहीं और नौकरी का डर, मैच शुरू हुआ नहीं हारने का डर, जो चीज अभी हुई नहीं उससे आप कैसे डर सकते हैं. इंसान को एक दिन मरना ही है तो क्या वह जन्म से ही डरने और रोने लग जाता है. डर की वजह से आप अपने काम पर पूरा ध्यान नहीं देते हैं और परिणाम वही आता है, जिसका आपको डर रहता है.

 

कैसे निकाले डर को

डर को एक बार निकालने की कोशिश करो और फिर परिणाम देखो क्या आता है. क्रिकेट में खिलाड़ी को यह डर होता है कि कहीं मैं आउट नहीं हो जाऊं, जिसकी वजह से वह रन बनाने की जगह आउट होने से बचा रहता है. वह रन नहीं बना पाता है और आउट हो जाता है.

अगर वो यह सोचे कि मेरा काम तो सिर्फ रन बनाना है, तो उसका ध्यान सिर्फ रन बनाने पर ही होगा और वह रन बनाता भी है. और वो कहते है ना डर के आगे ही जीत है, तो रही बात डर दूर करने की तो आप अपने काम पर ध्यान दीजिए. रिजल्ट के डर का ख्याल आपको कभी आएगा ही नहीं.