जलती लकड़ी से हुई भोले बाबा की पिटाई, फिर बना उगना महादेव मंदिर

क्या आपको बिहार के मधुबनी जिले के भवानीपुर गाँव के उगना महादेव मंदिर के विषय में आपको रोचक कथा पता हैं, कि आखिर इस मंदिर का नाम उगना महादेव मंदिर कैसे पड़ा. दरअसल इसके पीछे एक बहुत ही रोचक कथा हैं. इस मंदिर में भगवान् भोले नाथ को विराजमान होने के पहले चूल्हे की जलती लकड़ी से मार तक खानी पड़ी थी. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर किसने भगवान् भोले भंडारी की जल्दी लकड़ी से पिटाई कर दी और भगवान् ने आखिर क्या किया था जो उनके साथ में ऐसा हुआ. वहीं आपके मन में यह ख़याल भी आ रहा होगा की भगवान् भोलेनाथ ने लकड़ी से पीटने वाले का क्या हाल किया होगा तो आइये आपको बताते हैं इस रोचक कहानी के बारे में.

 

नौकर बनकर कवि के घर रहने लगे थे भगवन शिव

दरअसल बहुत समय पहले की बात हैं बिहार के एक गाँव में एक बहुत प्रसिद्ध कवि थे विद्यापति, जो की राजदरबार के भी कवी थे. विद्यापति की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी किन्तु वे भगवान् शिव के परम भक्त थे और अपनी रचनाओ में भगवान् शिव का वर्णन करते थे. एक बार प्रशन होकर भगवांन शिव ने सोचा क्यों न अपने इस भक्त के पास चला जाए और फिर क्या था भगवान् शिव एक जाहिल गंवार के रूप में पहुँच गए विद्यापति के घर. यहाँ पहुचंकर भगवान् भोले ने नौकरी मांगी जिसपर विद्यापति ने इनकार कर दिया लेकिन विद्यापति की पत्नी ने भगवान् भोले को दो समय के भोजन पर नौकरी पर रख लिया. आपको बता दे कि यह नौकर के रूप में भगवान् शिव ने सबको अपना नाम उगना बताया था ऐसे में उगना घर के काम करने लगा.

 

भगवान् शिव की हो गई जलती लकड़ी से पिटाई

एक समय उगना विद्यापति के साथ राज दरबार को और चल दिया, जहाँ रास्ते में कवि विद्यापति को जोरो की प्यास लगी ऐसे में उन्होंने उगना से पानी लेकर आने को कहा. उगना भी थोड़ी दूर गया और अपनी जटाए खोलकर उसमे से गंगाजल एक लोटे में भरकर विद्यापति को दे दिया. प्यास से मजबूर विद्यापति ने जैसे ही पानी पिया वे गंगाजल के स्वाद को समाझ गए और उन्हें उगना पर संदेह हुआ. विद्यापति ने अपने संदेह को दूर करने के लिए उगना से पूछा की तुम कौन हो अपने असली रूप में आओ. ऐसे में अपने भक्त की बात सुनकर भगवान भोलेनाथ अपने असली रूप में आये और उन्होंने विद्यापति से किसी को भी यह बात न कहने के लिए कहा विद्यापति ने भी यह मान ली और भगवान् ने विद्यापति को दर्शन दे दिए. लेकिन एक दिन विद्यापति की पत्नी ने उगना से एक कार्य करने को कहा जिसे उगना ठीक से नहीं कर सका जिसपर क्रोधित होगा विद्यापति जी की पत्नी ने चूल्हे से जलती लकड़ी निकाली और उगना को पीटना चालु कर दिया. भगवान् भोले को पीटता देख विद्यापति के मुहं से निकला अरे तुम भगवान शंकर को मार रही हो एसा सुनते ही भगवान् शंकर वहां से गायब हो गए. ऐसे में विद्यापति अपने भगवान् को वन-वन ढून्डने लगे, ऐसे में अपने भक्त के लिए भवान शिव प्रकट हुए और कहा कि अब में तुम्हारे साथ नहीं रह् सकता लेकिन जहाँ मैं रुका था वहां मेरा शिवलिंग होगा. आपको बता दे कि यह शिवलिंग ही भगवान् उगना महादेव के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ.