Religious

मोक्षदायक और मनोकामनाओं का पूरक हैं महाकाल मंदिर

धर्म और आस्था की नगरी उज्जैन देश के उन शहरो में से एक हैं जहाँ भगवान भोले नाथ की विशेष कृपा हैं. कालो के काल महांकाल के इस शहर में धर्म और संस्कर्ती को न केवल मंदिरों की कलाकृतियों में अनुभव किया जाता हैं बल्कि यह इस शहर के हर निवासियों की रग रग में बसता हैं. हर पर हर घडी श्रधालुओ की लम्बी कतारों से भरा महांकाल मंदिर न केवल लोगो को कष्टों से मुक्ति दिलाता हैं बल्कि मनोकामनाओ की पूर्ति भी करता हैं. वैद पुराणों में इस मंदिर के बखान तो मिलते ही हैं साथ ही में लाखो- करोडो  श्रधालुओ की भावनाओ में भी महांकाल मंदिर की महत्ता के दर्शन होते हैं. 12 ज्योतिर्लिंगो में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का अपना ही एक विशेष महात्व हैं. कहते हैं कि अगर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर लिए तो काल का भय भी नहीं सताता. कुछ ऐसी ही विशेषतो को अपने अन्दर लिए हैं महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग.

 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता

12 ज्योतिर्लिंगो में से एक 18 शक्ति पीठ में शामिल महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एक मात्र ऐसा मंदिर हैं जहाँ स्वंमभू रूप में भगवान शिव विराज मान रहते हैं. महाकालेश्वर मंदिर की प्रतिमा दक्षिण मुखीं हैं, जो तंत्र विद्या के लिए विशेष फलदाई हैं साथ ही मोक्ष की प्राप्ति कराती हैं, आपको बता दे कि यह विशेषत  द्वादश ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को ही प्राप्त हैं.  केवल दर्शन मात्र से ही सारे कष्टों का निवारण करने वाला महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग शिव जी का तीसरा ज्योतिर्लिंग कहलाता है.  अपने आप में ही यह एक चमत्कार है कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का शिखर इस तरह का हैं कि यह असमान  को छूता हुआ दिखाई देता है.

 

मंदिर की परिसर का वर्णन

उज्जैन नगरी में महांकाल बाबा अपनी छत्र छाया बनाए हुए हैं, अगर बात करे महांकाल बाबा के इस मंदिर की तो यह रूद्र सागर सरोवर के किनारे पर बसा हुआ है. मंदिर की परिसर में घुसते ही आपको इस मंदिर का शिखर दिखाई पड़ता हैं, परकोटे के भीतर स्थित इस मंदिर में महांकाल बाबा गर्भ गृह में स्थित हैं जहाँ सीढियों के द्वारा पहुंचा जाता हैं. इसके ठीक ऊपर एक दुसरे कक्ष में ओंकारेश्वर शिवलिंग हैं.  इसके साथ ही इसमें  ही गणेशपार्वती और कार्तिकेय की प्रतिमा को भी पश्चिमउत्तर और पूर्व में स्थापित हैं वहीं शिव के वाहन नंदी की प्रतिमा दक्षिण की तरफ स्थापित की गई हैं. वहीं इस मंदिर केर साथ में नागचंद्रेश्वर का मंदिर भी हैं जिसे साल में एक बार नागपंचमी के दिन खोला जाता हैं. मंदिर चारो और दीवारों से घिरा हुआ हैं और उसके बाहर पवित्र शिप्रा नदी हैं. जहाँ लाखो-करोडो श्रद्धालु स्नान कर अपने पापो को धोते हैं और भगवान महांकाल के दर्शन से अपने आप को धन्य करते हैं.