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महामृत्युंजय मंत्र के प्रकार और हमेशा स्वस्थ रहने का रहस्य

महामृत्युंजय मंत्र वैद काल से चला आ रहा एक अति प्राचीन और सिद्ध मंत्र है | इस मंत्र के जपने मात्र से इंसान के समस्त दुखो का नाश होकर वह जन्म-मरण के पापो से मुक्त हो जाता है | यह कलिकाल से चला आ रहा एक अत्यंत ही दुर्लभ मंत्र है | इस मंत्र के सवा लाख जाप करके आप अपनी आने वाली समस्त बाधाओ का नाश कर सकते है | महामृत्युंजय मंत्र को घर अथवा मंदिर में कंही भी जाप किया जा सकता है | महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय हमे ये सावधानी रखनी चाहिए की मंत्र का उच्चारण गलत न हो |

 

महामृत्युंजय मंत्र का इतिहास:

महामृत्युंजय मंत्र का रहस्य

प्राचीन काल में एक मुनिवर मृकंदु और उनकी पत्नी मरूदमति की कोई संतान नही थी | वो दोनों पुत्र की प्राप्ति के लिए दिन-रात भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना किया करते थे एक दिन भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया तुम्हे एक तेजस्वी और बुद्धिमान पुत्र की प्राप्ति होगी परन्तु वो अल्पायु होगा कुछ वर्ष बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी | मुनिवर ने अपने पुत्र का नाम मार्कन्डेय रखा उनका पुत्र मार्कन्डेय छोटे से ही भगवान भोलेनाथ का परम भक्त था | मार्कन्डेय दिन-रात भगवान भोलेनाथ की सेवा में लगे रहते था | वो हर समय महामृत्युंजय मंत्र  का जाप करते रहते थे | जब मार्कन्डेय की मृत्यु की घड़ी आई तब भी वो भगवान भोलेनाथ की पूजा में ही लगा हुआ था | जब यम के दूत मार्कन्डेय के प्राण लेने के लिए आये तो भगवान भोलेनाथ की पूजा के प्रभाव के कारण वो मार्कन्डेय के प्राण नही ले पाए | तब सवयं यमराज मार्कन्डेय के प्राण लेने के लिए आये जब यमराज ने अपना यश्पाश मार्कन्डेय के गले में फेका तो वो गलती से शिवलिंग पर पड़ गया इससे क्रोधित होकर शिव जी वह सवयं उपस्थित हुए और यमराज पर त्रिशूल से वार करने लगे उस दिन यमराज को सवयम अपनी मृत्यु सामने नजर आने लगी और उन्होंने शिव से क्षमा याचना मांगी | तब भगवान भोलेनाथ ने यमराज से अपने परम भक्त मार्कन्डेय के प्राण नही हरने के लिए कहा और मार्कन्डेयको दीर्घायु प्रदान करने के लिए कहा | क्यूँ की भगवान शिव कालो का काल बनकर आये मतलब सवयम यमराज के प्राण लेने के लिए आये तब से उन्हें महाकाल के नाम से जाना जाने लगा | इस तरह मृत्यु को हराकर मार्कन्डेय मुनि विशव में सदा के लिए प्रसिद्ध हो गए |

 

महामृत्युंजय मंत्र के १०८ बार जाप:

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महामृत्युंजय मंत्र के प्रकार :

महा मृत्‍युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बक यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धन्म। उर्वारुकमिव बन्धनामृत्येर्मुक्षीय मामृतात् !!

संपुटयुक्त महा मृत्‍युंजय मंत्र :

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

लघु मृत्‍युंजय मंत्र :

ॐ जूं स माम् पालय पालय स: जूं ॐ। (माम् के स्थान पर आप किसी व्यक्ति का नाम भी ले सकते है अगर आप किसी और के लिए यह मंत्र जाप कर रहे हो तो)

महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ :

समस्त संसार के पालनहार तीन नेत्रो वाले भगवान शिव की हम आराधना करते है विश्व में सुरभि फेलाने वाले भगवान शिव मृत्यु न की मोक्ष से हमे मुक्ति दिलाये |

 

महामृत्युंजय मंत्र जप क्यों करना चाहिए :

महामृत्युंजय मंत्र के जाप से आप पर आने वाले सभी कष्ट समाप्त हो जाते है | अगर आपके घर या परिवार में किसी का स्वास्थ्य ठीक नही हो तो आप उसके उत्तम स्वास्थ्य के लिए महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जाप करवा सकते है ऐसी मान्यता है कालो के काल भगवान महाकाल अकाल मृत्यु को भी टाल देते है |

 

महामृत्युंजय मंत्र कैसे है विशेष फलदायी :

महामृत्युंजय मंत्र को आप घर में भी प्रितिदीन जाप कर सकते है  और जब आपके सवा लाख जाप पुरे हो जाये तो आप चाहे तो घर में हवन भी करवा सकते है | अगर आप किसी मंदिर में पंडित से सवा लाख जाप महामृत्युंजय मंत्र के करवाते है तो ये भी विशेष फलदायी होता है |