तात्कालिक सरकार में मेरी रेल यात्रा, बदल गयी भारतीय रेल की छवि

आज दोपहर करीब 2 बजे हम स्टेशन की तरफ चले और 3 बजे हमारी रेल इंदौर से निकली। अब भैया शुरू होता है हमारा सफर। भारतीय रेल की हालत आपको कैसे बताऊ ये सोच रहा था। क्योकि आप ओर मेरे मन मे तो भारतीय रेल की वही छवि बनी है,गंदे स्टेशन,गंदे डब्बे और डब्बो के अंदर बंद पड़े पंखे। लेकिन जो आज मेने देखा वो मेरी सोच से थोड़ा परे था। समय से पहले जलती लाइट और समय से पहले चलता पंखा। मेरी सोच को प्रश्न चिन्ह लगा रहा था। जहां एक समय गंदगी और कूड़ा पड़ा रहता था वही अब साफ-सफाई नजर आ रही थी, देखते ही देखते ट्रेन चल पड़ी। ट्रेन के चलते ही मेने अपना मोबाइल फोन निकला जो कि कि चार्जिंग लगाने के लिए कबसे टू-टू आवाज कर रहा था,पर मेरे मन मे तो वही बात थी कि लोकल डब्बो में चार्जर सॉकेट  कहाँ। लेकिन फिर भी एक बार मन को तसल्ली देने के लिए चार्जर निकालकर सॉकेट में लगाया और खटका चालू करते ही जल गई चार्जिंग की लाईट।

 

कैसे बदली ट्रेनों की सूरत


ट्रेन में मिली इस सुविधा को देखकर में इसका लाभ लेने के बजाए बस यही सोचने लगा कि आखिर भारतीय रेल की यह हालत कैसे बदली , फिर कही दूर से एक बुजुर्ग व्यक्ति की आवाज कानो में पड़ी। वे मौजूदा सरकार की तारीफों के पुल बांद रहे थे और कह रहे थे कि भले कितनी भी आलोचना की जाए यह मौजूद सरकार निखरकर ही सामने आती है, कामो के होने में समय लगा पर 70 सालो की तुलना में 3-4 साल तो कम ही है।

 

क्या करने की जरुरत

तात्कालिक सरकार को अपने कामो को लोगो के बिच बताने की जरुरत हैं, क्योकि आम लोग अब तक केवल वादे सुनते आये हैं ऐसे में जरुरी हो जाता हैं कि सरकार अपने द्वारा किये जा रहे कार्यो की जानकारी विस्तार पूर्वक आम जनता को दे। ऐसा करने से किसी के भी बरगलाने य बहकाने से आम व्यक्ति को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। फिलहाल तो हम यही कह सकते हैं कि आने वाले चुनावो में एक बार फिर तात्कालिक सरकार ही पूर्ण बहुमत से विजय होगी।

Rohit