एलियंस को भेजते थे फ्रीक्वेंसी, ब्रम्हांड को लेकर इन बातों का पता लगा चुके थे स्टीफ़न

मशहूर वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग ने आज 76 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है. स्टीफ़न का जन्म 8 जनवरी 1942 को इंग्लैंड के ऑक्सफ़ोर्ड में हुआ था. 21 साल की उम्र में ही उन्हें ऐसी बीमारी हो गई थी, जिसके कारण उनके शरीर के कई हिस्सों ने काम करना बंद कर दिया था. हालांकि इसके बाद स्टीफ़न हॉकिंग ने हार नहीं मानी और विज्ञान के क्षेत्र में नई खोज जारी रखी. बिग बैंग थ्योरी, सापेक्षता (रिलेटिविटी) और ब्लैक होल को समझने में हॉकिंग की अहम भूमिका थी.

बता दे कि स्टीफ़न हॉकिंग दुनिया के सर्वकालीन महान वैज्ञानिकों में से एक थे. स्टीफन हाकिंग लगातार एलियंस से संपर्क बनाने की कोशिश कर रहे थे. वह पिछले कुछ सालों से ऐसे प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहे थे, जिससे धरती का संपर्क आकाशगंगा या सौरमंडल के अन्य ग्रहों पर रहने वालों से हो सके. वह ऐसी कुछ फ्रीक्वेंसी अंतरिक्ष में छोड़ रहे थे जो इन ग्रहों से टकरातीं.

बता दे कि अमेरिका सहित कई जगहों पर बड़ी बड़ी टेलीस्कोप और फ्रेक्वेंसी भेजने के लिए डिवाइस तैयार की गईं, ताकि इनकी मदद से ब्रम्हांड के रहस्य का पता लगाया जा सके. इन फ्रेक्वेंसी का इस्तेमाल स्टीफ़न हॉकिंग ने भी किया था. उन्होंने लगातार ब्रम्हांड में सिग्नल भेजे. स्टीफ़न हॉकिंग के साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों ने कहना है कि स्टीफ़न हॉकिंग ने बाहरी दुनिया से आ रहे कुछ संकेतों को पकड़ा है.

कई बार सौरमंडल में हजारों करोड़ किलोमीटर की दूरी पर सिग्नल टकराने से स्टीफन को लगता था कि हम अकेले नहीं हैं. दुसरे ग्रह पर भी लोग रहते है. हालांकि इसके लिए उन्हें आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ता था. उनके आलोचक मानते थे कि ऐसा करने हम खुद एलियंस को आमंत्रित कर रहे है. उनको लगता है कि एलियंस के आने से हम आफत में पड़ सकते है.

बता दे कि स्टीफ़न हॉकिंग अक्सर कहा करते थे कि सन् 2100 के खत्म होते-होते धरती पर मानव प्रजाति के सामने कई कई साड़ी परेशानियाँ खडी हो जाएगी. मानव को अपना अस्तित्व बचाने के लिए दूसरे ग्रहों जाना पड़ेगा. स्टीफ़न हॉकिंग का कहना था कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो 200 सालों बाद यह धरती ख़त्म हो जाएगी.

mohit sharma