कवि की कलम से 1 – जाते हुए मांझी का सलाम ले जा

जाते हुए मांझी का सलाम ले जा,

जो लगे तो ये पैगाम ले जा।

जो न चला तेरा दिमाग दुरुस्त

तो २ किलो बादाम ले जा,

जाते हुए मांझी का सलाम ले जा।।

जो सुबह की किरण बुदबुदाए तुझको,

तो सुर्ख अंधेरो में कटी शाम ले जा।

जाते हुए मांझी का सलाम ले जा।।

जो मिला हो तुझे चेन का एक पल ,

तो उसमे मुद्दतो से न मिला ऐसा तू आराम ले जा

जाते हुए मांझी का सलाम ले जा।।

जिसकी तलाश में तू भटका है,

ऐसा ही कोई बड़ा नाम ले जा।

जाते हुए मांझी का सलाम ले जा।।

Rohit