आज की दुनिया से कहीं आगे था प्राचीन भारत, बहुत पहले हो चुके थे यह अद्भुत अाविष्कार

आज के आधुनिक समय में विज्ञान काफी तरक्की कर चूका है. आज हमारा जीवन पूरी तरह विज्ञान पर आधारित है. विज्ञान रोज-रोज ऐसे अविष्कार कर रहा है, जिनके बारे में जानकर हम हैरान हो जाते है. लेकिन अगर हम पुराने समय की बात करें तो हमें पता चलेगा कि पुरातन विज्ञान और सिद्धांत आज के समय से कहीं आगे था. कुछ बातों पर गौर करें तो हमें पता चलेगा कि संसाधनों के अभावों के बाद भी बड़ी से बड़ी बातों का पता लगाने में हम कामयाब हो पाए हैं. आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे है, जिनके बारे में जानकर आप भी मानोगे कि पुरातन विज्ञान आज के समय से कहीं आगे था.

सोलर सिस्टम

सोलर सिस्टम की जानकारी के बारे में हमारे वैज्ञानिकों को काफी बाद में पता चला जब कि अगर ऋगवेद पर गौर करें तो हमें पता चलेगा कि ऋगवेद में पहले ही बता दिया गया था कि सूरज अपनी कक्षा में घूमता है और वह पृथ्वी और बाकी ग्रहों के बीच इस प्रकार संतुलन बनाए रखता है कि वे एक-दूसरे से ना टकराएं.

गुरुत्वाकर्षण

ऋगवेद में बताया गया था कि पृथ्वी अपनी सतह पर घूमती है और धरती पर जो भी व्यक्ति है वो भी उसी अनुसार घूमते हैं. उसमे बताया गया है कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है.

धरती और सूर्य के बीच की दूरी

धरती और सूर्य के बीच की दूरी के बारे में पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों को खासी मशक्कत करनी पड़ी जबकि हनुमान चालीसा के एक श्लोक में कहा गया है कि “जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू” यानी सूर्य, पृथ्वी से जुग सहस्त्र योजन की दूरी पर है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि वैज्ञानिकों द्वारा नापने पर भी ये दूरी लगभग इतनी ही आई है.

प्रकाश की चाल

पुरातन काल में प्रकाश की चाल को लेकर बताया गया था कि, ‘सूर्य आधे निमेश में 2202 योजन दूरी तय करता है.’ बता दे कि बाद में गणना करने पर आंकड़े इसके बराबर ही थे.

धरती की सतह से जुड़ी जानकारी

ब्रह्मगुप्त ने 7वीं शताब्दी में धरती की सतह के बारे में जानकारी दी थी कि धरती की परिधि लगभग 36,000 किलोमीटर है. वैज्ञानिकों द्वारा की गई गणना में धरती की परिधि इससे कुछ ही ज्यादा निकली.

ऑर्गन ट्रांसप्लांट

ऑर्गन ट्रांसप्लैंट वैज्ञानिकों द्वारा हासिल की गई एक बड़ी उपलब्धी है, जबकि पुराणों में जिक्र मिलता है कि जब भगवान गणेश सर कट गया था तो उनके सर पर हाथी का सिर लगाया गया था.

लाइव टेलीकास्ट

आज हम टीवी के माध्यम से किसी भी घटना का लाइव टेलीकास्ट देख सकते है, लेकिन महाभारत में संजय ने धृतराष्ट्र को पूरी महाभारत का विश्लेषण घटना के स्थान से मीलों दूर बैठे सुनाया था.