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Rakshabandhan 2018ः भारत के इन गांव में बहनें नहीं बांधती भाई को राखी, वजह जान हैरान रह जाएंगे

राखी का त्योहार भाई-बहन का अटूट प्रेम का प्रतीक होता है. राखी का त्योहार देश के हर हिस्से में  मनाया जाता है. लेकिन हिंदुस्तान में कई ऐसे गाँव है जहां पर बहन अपने भाई को राखी नहीं बांधती है.  इतना ही नहीं इन गांवों राखी के त्योहार को त्योहार नहीं बल्कि मातम का दिन मानकर लोग रोते भी हैं। एक गांव तो ऐसा भी है जहां भाई बहनों से इसलिए भी राखी नहीं बंधवाते की बहनों को उपहार देना पड़ेगा। दरअसर इन सबके पीछे हैरान करने वाली कहानी है.

 

जिसने मनाई राखी हुई उसके साथ अनहोनी

राखी को मातम के दिन मानने वाला एक गांव है उत्तर प्रदेश के मुरादनगर का सुठारी गांव। इस गांव में छबडिया गौत्र के लोग राखी का त्योहार नहीं मनाते हैं। इसकी वजह यह है कि ये लोग अपने आपको ये लोग अपने आपको पृथ्वीराज चौहान के वंशज मानते हैं। यहां के लोगों का कहना है कि रक्षाबंधन के दिन यहां पर मोहम्मद गौरी ने हमला किया था क्योकि उसे पता चल गया था कि उसके वंशज इस गांव में रहते हैं। गौरी ने लोगों को हाथी के पैरों से कुचलवाकर मार दिया था। इस हमले में सोहरण सिंह राणा की पत्नी राजवती जीवित बच गईं थी, क्योंकि उस वक्त वह अपने मायके गईं थी। अपने दो बेटों लखी और चुपड़ा के साथ राजवती ने फिर से इस गांव को बसाया। उस घटना को याद करके आज भी इस गांव के लोग राखी नहीं मनाते। लोगों का यह भी विश्वास है कि जब किसी ने यहां राखी मनाई उसके साथ उनहोनी घटना हो गई।

उस घटना को याद करके आज भी राखी नहीं मनाते लोग

 

उत्तर प्रदेश के हापुड़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला धौलाना के साठा क्षेत्र में लोग राखी के दिन बीते दिनों को याद करके रोते और बिलखते हैं। इसकी वजह यह है कि यहां के राजपूत खुद को महाराणा प्रताप के वंशज मानते हैं। यहां के लोगों का कहना है कि रक्षाबंधन के दिन महाराणा प्रताप को हार का मुंह देखना पड़ा था और युद्ध में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे। उस दिन को याद करके लोग राखी के दिन मातम मनाते हैं।

राखी के उपहार के कारण नहीं मनाते राखी

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक यादव बाहुल्य गांव है बेनीपुर चक जहां सदियों से राखी का त्योहार नहीं मनाया जाता है। इसकी एक अजब-गजब कहानी है। इस गांव के लोग अन्य गांव से आकर यहां बसे हैं। इसकी वजह राखी का त्योहार बताते हैं। यादवों की एक मुंहबोली बहन थी जो ठाकुरों की बेटी थी। एक बार राखी के मौके पर उपहार मांगने को यादव भाइयों ने कहा तो बहन ने गांव की जमींदारी मांग ली। बातों के धनी यादवों ने बहन को गांव दे दिया और बेनीपुर में आकर बस गए। इस घटना से सहमे यहां के लोग आज भी इस बात के कारण राखी नहीं बंधवाते की कहीं बहन राखी के बदले उनसे उनका सबकुछ ना मांग ले।