रावण ने मृत्यु के समय अपने बेटे इन्द्रजीत से कही थी ज्ञान की 5 बातें !

हर इंसान अपनी जिंदगी में खुश रहना चाहता है. आजकल के लोग बहुत स्वार्थी और मतलबी किस्म के हो गए है वे अपना काम पहले करवाते है और अपना बारे में ही सोचते है. समय के साथ-साथ इंसान भी बदल गया है वह अपने स्वार्थ के लिए दूसरा का बुरा करने से भी नहीं चुकते है. आजकल के लोग किसी भी कारण से अपनों का ही खून का प्यासा बन जाता है. बुजुर्गो की एक कहावत है दूसरों का अच्छा सोचने वालों का खुद का भी अच्छा ही होता है. सच में यह कहावत बिलकुल सटीक है. यदि आप किसी के बारे में अच्छा सोचेंगे तो दूसरा व्यक्ति भी आपके बारे में अच्छा सोचेगा. बहरहाल आज हम आपको रावण के बारे में कुछ खास बातों के बारे में बता रहे है जो बातें उन्होंने म्रत्यु के समय अपने बेटे इन्द्रजीत से अंतिम छणों में कही थी.

 

रावण था एक अच्छा पिता

रावण को सोच चाहे कितनी ही बुरी थी लेकिन वे एक अच्छा पिता में गिने जाते थे. अपनी बहन और बेटे के प्रति बेहद समझदार थे. रावण की अच्छाइयों की वजह से भगवान शिव ने न मरने का वरदान दिया था. रावण ने मृत्यु के दौरान अपने बेटे इन्द्रजीत को पांच ज्ञान की बताई थी. जिन बातों की वजह से इंसान को सम्मान और लक्ष्य को हासिल करने में स्वयं भगवान भी सहायता करते है. तो देर किस बात की आइये जानते है रावण की पांच ज्ञान की बातें.

 

 

 

  • बिना पिता की सेवा के स्वर्ग प्रपात करना असंभव है. पिता की सेवा के बिना इष्ट भगति भी व्यर्थ ही जाती है. क्योंकि, पिता की सेवा बिना परमात्मा भी खुश नही हो सकता. और परमात्मा ही हम सबका पिता है और हुम् सब उसके बच्चे हैं.
  • रावण ने मरते समय अपने बेटे से कहा कि जो अपने पिता का सम्मान नहीं करता है और उन्हें छोड़ के चला जाता है तो ऐसे इंसान को भगवान कभी माफ़ नहीं करता है.
  • रावण के मुताबिक बेटे को को पिता के सामने पाप और पुण्य की बातें छोड़ देनी चाहिए. हर बेटे को अपने माता-पिता के प्रति निष्काम भाव से सेवा करनी चाहिए. अपने माता पिता की सेवा में चाहे बेटे के प्राण ही चले जाये लेकिन अंतिम सांस तक सेवा करनी चाहिए.
  • हर आदमी का पिता ही उसका जन्मदाता होता है. बेटे को भी अपने पिता में भगवान का स्वरूप दिखाई देना चाहिए. एक पिता का आशीर्वाद भगवान के आशीर्वाद से कम नहीं होता है.
  • रावण के अनुसार यदि पिता की आज्ञा का पालन पूरी तरीके से करते हुए बेटे के प्राण भी चले जाये तो बेटे का जीवन धन्य हो जाता है. यदि बेटे से किसी भी प्रकार की भूल से पाप हो जाता है तो अपने माता-पिता की सेवा करके वह पाप आसानी से धुल जाता है.
  • रावण के कथन के मुताबिक बिना माता-पिता की सेवा के बिना स्वर्ग प्राप्त नहीं होता है. बिना पिता की सेवा के स्वर्ग प्रपात करना असंभव है. पिता की सेवा के बिना इष्ट भगति भी व्यर्थ ही जाती है. माता-पिता की सेवा न करने से भगवान भी प्रसन्न नहीं होते है.