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मरने से पहले रावण ने लक्ष्मण को बताई थी यह तीन बातें, जो आज भी है प्रासंगिक

हम जब तक अच्छे काम करते है तब तक समाज हमारी प्रशंसा करता है, लेकिन जैसे ही हमनें कोई एक गलत काम भी किया, हम सदैव के लिए बुराई के पात्र बन जाते है. ऐसा ही कुछ हुआ लंकापति रावण के साथ. रावण ने हर काम बुरा नहीं किया, लेकिन माता सीता का हरण करना उसकी जिन्दगी की सबसे बड़ी भूल थी. अगर वह ऐसा नहीं करता तो शायद आज वह भी देवता के समान पूजा जाता.

महापंडित था रावण

रावण के पिता एक ऋषि और माता एक असुर कन्या थी. यहीं कारण है कि माता से रावण में असुरों के गुण आ गए, वहीँ पिता से तपस्या का गुण. रावण को आज पूरा विश्व राक्षस के नाम से जानता है, लेकिन वह एक महापंडित था. अपनी कठोर तपस्या के कारण ही उसने भगवान शिव को प्रसन्न किया. भगवान राम भी रावण के ज्ञान से भली-भांति परिचित थे, इसलिए जब रावण युद्द में हारने के बाद अपनी जिन्दगी की अंतिम सांसे गिन रहा था. तब भगवान राम ने श्रीराम ने अनुज लक्ष्मण को बुलाकर कहा कि, ‘जाओ, रावण के पास जाओ और उससे सफल जीवन के अनमोल मंत्र ले लो.’ पहले तो लक्ष्मण रावण सर के पास जाकर खड़े हो गए, लेकिन भगवान राम के कहने पर रावण के पैरों के पास जाकर खड़े हुए और सफल जीवन के मंत्र देने की प्रार्थना की. तब रावण ने लक्ष्मण को तीन मंत्र दिए.

पहला मंत्र

रावण ने लक्ष्मण को पहला मंत्र दिया कि कभी भी शुभ काम करने में देरी नहीं करना चाहिए और अशुभ कार्य को जितना हो सके टाल देना चाहिए. मैंने भी श्रीराम को पहचानने में देरी कर दी. इसी कारण मेरी यह हालत हुई है.

दूसरा मंत्र

आगे रावण ने लक्ष्मण को कहा कि कभी भी अपने प्रतिद्वंद्वी या अपने शत्रु को छोटा नहीं समझना चाहिए. मैंने श्रीराम को तुच्छ मनुष्य समझा, यह मेरी सबसे बड़ी भूल थी. जब मैंने ब्रह्माजी से अमरता का वरदान मांगा था तो मैंने कहा था कि मनुष्य और वानर के अतिरिक्त कोई मेरा वध न कर सके. क्योंकि मैं मनुष्य और वानर को तुच्छ समझता था.

तीसरा मंत्र

रावण ने लक्ष्मण को तीसरा और अंतिम मंत्र यह दिया कि अपने जीवन का कोई राज हो तो उसे किसी को भी नहीं बताना चाहिए. मैंने भी अपनी मौत का राज विभीषण को बताया, अगर मैं ऐसा नहीं करता तो आज मेरी यह हालत ना होती.