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झूट बोलने से हो सकता हैं भारी नुकसान, बताती हैं यह कथा

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अपने बड़े-बुजुर्गो से इस बात को जरुर सुना होगा कि एक झूट को छुपाने के लिए कई सारे झूट बोलने पढ़ते है. और फिर झूट का सिलसिला इस कदर शुरू होता हैं कि आप इसके आदि हो जाते हैं और फिर एक के बाद एक झूठ बोलने पड़ते हैं. लेकिन जब आपके झूठ से पर्दा उठता है तो काफी ज्यादा शर्मिंदगी होती हैं. कभी कभी तो झूठ के चलते आपको भारी नुकसान भी झेलना पड सकता हैं. आज हम आपके लिए एक ऐसी ही कहानी लेकर आये हैं जिसमे एक आदमी को झूट बोलने के कारण अपनी जिंदगी से हाथ धोना पडा.

 

खेल खेल में गाँव वालो से झूट बोलता था एक चरवाहा

एक समय एक गाँव में एक चरवाहा रहता था, वह काफी मस्तमौला था और जो काम उसे अच्छा लगता वही करता था. वह अपने स्वभाव से काफी मजाकिया था और आये दिन गाँव वालो का मजाक बनता रहता था. वो मजाक मजाक में गाँव वालो को इकठ्ठा करने के लिए जोर जोर से चिल्लाता था कि शेर आया शेर आया. चरवाहे की इस आवाज को सुनकार गाँव के लोग लकड़ी हथियार लेकर चरवाहे की मदद के लिए आ जाया करते थे. लेकिन वे जैसे ही चरवाहे के पास आकर इकठ्ठा होते, चरवाहा जोर जोर से हंसने लगता. अपना मजाक उडा देख गांववाले दुखी होकर वहां से वापस चले जाते.

 

झूठ के कारण गवाई जान

एक दिन फिर चरवाहे ने गांववालों के साथ यही मजाक किया, अब गाँववाले चरवाहे कि इस बात को समझ गए कि उसकी आदत हैं झूठ बोलने की और हंसी ठिठोली करने की. लेकिन एक दिन असल में एक शेर चरवाहे के पास आ गया, तब डर के मारे चरवाहे ने जोर-जोर से आवाज लगाईं कि शेर आया शेर आया, लेकिन इस बार गाँववालो ने सोचा की चरवाहा एक बार फिर से उनको मुर्ख बना रहा हैं और अगर वे चरवाहे के पास जायेंगे तो वे फिर से हंसी का पात्र बनेंगे. ऐसे में कोई भी चरवाहे के पास उसकी मदद के लिए नहीं गया. शेर ने पहले चरवाहे के पशुओ को खाया बाद में चरवाहे को भी मार दिया. अपने अंतिम समय में चरवाहे को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह मन ही मन कहने लगा कि कभी झूठा मजाक नहीं करना चाहिए,वर्ना कोई भी समय आपने पर आपकी बातो को सच नहीं मानेगा.

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