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EVM का रोना रोने वालों एक बार आंकड़े देख लो, आँखे खुल जाएगी

Samajwadi Party (SP) President and Chief Minister of Uttar Pradesh Akhilesh Yadav (L), and Vice President of main opposition Congress party Rahul Gandhi attend a joint press conference in Lucknow, India, January 29, 2017. REUTERS/Pawan Kumar

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विधानसभा चुनाव की तरह उत्तर प्रदेश में नगर निकाय में भी BJP सभी पार्टियों पर भारी पड़ी और 16 में से 12 नगर निगम की सीटों पर कब्जा जमा लिया. 2 सीटें जहाँ BSP के खाते में गई, वहीँ SP और कांग्रेस का तो खाता भी नहीं खुला. इस करारी हार के बाद विपक्षी पार्टियों ने विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी EVM का रोना शुरू कर दिया. हालाँकि इस बार विपक्षी पार्टियाँ कुछ तथ्य भी लेकर आई. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बोले हैं- “बीजेपी खाली 15% सीटें जीती है जहां चुनाव बैलेट से हुए और 46% जीती है जहां चुनाव ईवीएम से हुए.” अब सोचने वाली यह है कि जब अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है तो आंकड़े तो सही होंगे, ऐसे में क्या सचमुच भाजपा ने EVM में कोई गड़बड़ की है. तो हमने कुछ पिछले आंकड़े खंगाले और फिर जो सामने आया उसमे हैरान करने वाला कुछ भी नहीं था.

 

हमेशा से होता है ऐसा

जब हमने 2006 के नतीजों को देखा तो पता चला कि 2006 में हुए नगर निकाय चुनाव में जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब नगर निगम से लेकर नगर पालिका और नगर पंचायत तक सभी चुनाव बैलेट पेपर पर हुए थे. उस समय बैलेट पेपर पर चुनाव होने के बावजूद नगर निगम की 12 सीटों में 8 पर बीजेपी जीती थी. उस समय भी भाजपा पालिका में 191 में से सिर्फ 41 और पंचायत में 418 में से सिर्फ 57 सीटें जीत पाई थी.

 

 

2012 में भी हुआ था ऐसा

इसके बाद हमने 2012 के नतीजें खंगाले. 2012 में जब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और समाजवादी पार्टी सरकार ने थी. उस समय भी नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने 12 में से 10 नगर निगमों पर कब्जा किया था. जबकि दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती थी, यानी सपा, बसपा और कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी. उस समय नगर निगम के चुनाव EVM से हुए थे, ऐसे में क्या यह माना जाए आपके सरकार में रहते बीजेपी ने ईवीएम में गड़बड़ी करवा दी थी. वैसे उस समय भी परिषद में बीजेपी के खाते में 194 में से 42 और पंचायत की 423 में 36 सीटें आई थी.

 

2017 में भी हुआ ऐसा

अब बात करते है 2017 की. 2017 में भी बीजेपी ने 16 में से 14 नगर निगम जीते है. नगर पालिका की बात करे तो 198 में से 58 सीटें मिली और नगर पंचायत में 438 में से 95 सीटें BJP को मिली है. अगर विपक्षी पार्टियों की बात करें तो नगर पंचायत में सपा को 438 में से 79, कांग्रेस के 17 और बीएसपी के 41 सीटों पर जीत मिली है. बता दे कि पंचायत चुनाव बैलेट पेपर के जरिए हुए है, ऐसे में अब सवाल यह है कि जहाँ बैलेट पर चुनाव हुए है, वहां भी BJP सभी पार्टियों पर भारी पड़ी है. अखिलेश यादव कह रहे है कि, “जहाँ EVM से चुनाव हुए है, वहां BJP 46% सीटें जीती है, वहीँ जहां चुनाव बैलेट से हुए बीजेपी खाली 15% सीटें जीती है.” लेकिन यह भी सच है कि जहाँ बैलेट पर चुनाव हुए वहां विपक्षी पार्टियाँ 10% से भी कम सीटें जीती है. ऐसे में EVM का रोना रोने वालों जहाँ बैलेट से चुनाव वहां भी आप BJP को नहीं हरा पाएं है. पिछले दिनों ओडिशा में बैलेट पेपर से चुनाव हुए, वहां भी बीजेपी में पिछली बार से 10 गुना ज्यादा सीटें जीती.

 

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