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AAP से उठा विश्वास, अब शहीद कुमार के पास बचे है यह 5 विकल्प

आम आदमी पार्टी ने बुधवार को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी. यह तीन नाम है आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और सुशील गुप्ता का नाम तय किया है. इन तीन लोगों के नाम सामने आते ही आम आदमी पार्टी के भीतर हड़कम्प मच गया. पार्टी के ही कई नेताओं में नारायण दास गुप्ता और सुशील गुप्ता के नाम को लेकर नाराजगी है. सबसे बड़ा झटका लगा है अपनी पार्टी से राज्य सभा का टिकट पाने की आस लगाए आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास को.

विश्वास को लगा झटका

दरअसल कुमार विश्वास राज्य सभा जाने के लिए सबसे बड़े दावेदार थे. हालाँकि अपना नाम नहीं आने के बाद विश्वास ने राज्य सभा जाने वाले लोगों को तंज कसते हुए बधाई दी और अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ भी निशाना साधा. इस दौरान उन्होंने अपने आप को शहीद बताते हुए शव से छेडछाड न करने की बात कहीं. अब सवाल यह है कि राजस्थान के पार्टी प्रभारी कुमार विश्वास की आगे की रणनीति क्या होगी. आइये जानते है कि अब अरविंद केजरीवाल से मनमुटाव होने के बाद कुमार विश्वास के सामने क्या रास्ते बचे हैं.

शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ खोले मोर्चा

आम आदमी पार्टी द्वारा राज्य सभा उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करने के बाद कुमार विश्वास ने केजरीवाल पर निशाना साधा. ऐसे में कुमार विश्वास पार्टी में रहकर शीर्ष नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोले रख सकते हैं. हालाँकि ऐसा करने पर पार्टी उन्हें अनुशासन तोड़ने के मामले में बाहर कर सकती है.

अपना अलग गुट बनाना

कुमार विश्वास पूरे देश में एक जाना पहचाना नाम है. पार्टी के अंदर भी उन्हें भारी समर्थन प्राप्त है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंबाब और राजस्थान समेत कई राज्यों में पार्टी के नेता उनके समर्थन में आ सकते है. ऐसे में वह पार्टी में अपना अलग गुट बनाकर पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकते हैं.

बीजेपी में चले जाएं

कुमार विश्वास की बीजेपी नेताओं से करीबी किसी से छुपी हुई नहीं है. फरवरी 2016 में उनके जन्मदिन की पार्टी में आरएसस नेताओं, एनएसए अजीत, बीजेपी के रविशंकर प्रसाद, विजय गोयल, मनोज तिवारी और सुधांशु त्रिवेदी जैसे नेता मौजूद थे. ऐसे में कुमार विश्वास बीजेपी में जा सकते है.

नई पार्टी

कुमार विश्वास के पास एक विकल्प यह भी है कि वह समर्थकों और दूसरी पांत के नेताओं के साथ मिलकर दूसरी पार्टी बना ले. हालांकि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण पहले ऐसा कर चुके है, इसलिए कुमार विश्वास ऐसा करे इसकी उम्मीद कम ही है.

छोड़ दे राजनीति

राजनीति में आने से पहले ही कुमार विश्वास अपनी कविताओं के माध्यम से देश और दुनिया में बहुत प्रसिद्द थे. अगर उन्हें राजनीति रास नहीं आ रही है तो वह फिर से इसी दुनिया में लौट सकते हैं.

Source :- aajtak