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इन मंत्रों का जाप करने से कोई भी आदमी बन सकता है करोड़पति !

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इस संसार में हर व्यक्ति धन के पीछे दौड़ रहा है, लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद भी कोई व्यक्ति अमीर नहीं बन पाता है. जब व्यक्ति तमाम कोशिशों को करने के बाद भी वह असफल हो जाता है तो वह अपनी किस्मत को कोसता रहता है. बहरहाल आज हम बात कर रहे है मां लक्ष्मी को कैसे प्रसन्न किया जाये और कैसे अमीर बना जाये. दरअसल, वेद पुराण में धन प्राप्ति के कई उपाय का उल्लेख किया गया है. उन उपायों को करने से आप भी धनवान आसानी से बन सकते हो. लेकिन आपके अन्दर के भाव अच्छे होना बहुत जरुरी होता है यानिकी इन मंत्रो के उपचारण करते समय आपके मन में सच्ची श्रद्धा होनी चाहिए. शास्त्रों के अनुसार ऐसा कहा गया है कि इन मंत्रो में इतनी शक्ति होती है कि कोई भी व्यक्ति बड़ी से बड़ी समस्या का हल चुटकी में कर सकता है. तो देर किस बात की आइये जानते है इन मंत्रो के बारे में.

1 घर की आर्थिक स्थति सुधारने के लिये मंत्र

शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि जो परिवार या कोई व्यक्ति दो वक्त की रोटी से भी मोहताज हो जाता था उसके लिए भी श्री कृष्ण मंत्र प्रदान किया गया है.

 (गोवल्लभाय स्वाहा)

इस मंत्र का जाप करने से आर्थिक तंगी से निजात पाया जा सकता है. धर्म ग्रंथो के मुताबिक इस मंत्र करने वाले व्यक्ति को उसे संपूर्ण सिद्धियों की प्राप्ति होती है. खासकर यह मंत्र धन की प्राप्ति के लिए है. ग्रन्थ के मुताबिक इस मंत्र को सवा लाख बार जप करने के बाद से आर्थिक स्थिति में सुधार दिखाई देने लगता है.

2 करोड़पति बनने के लिए मंत्र

हर कोई व्यक्ति अमीर बनना चाहता है और बहुत कम समय में बड़ा बनना चाहता है तो आप श्रीकृष्ण के एक मंत्र का जाप कर सकते है. यह मंत्र आपको बहुत कम समय में बड़ा बनने में सहायता प्रदान करेगा.

(ऊं श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा।)
धर्म ग्रंथो के मुताबिक यह मंत्र भगवान श्रीकृषण का सप्तदशाक्षर महामंत्र है. इस मंत्र को 5 लाख बार जप करने से आपको उचित फल की प्राप्ति से कोई नहीं रोक सकता है.

3  कर्ज, रोजगार और प्रमोशन के लिए

इस मंत्र का जाप करने से कर्ज, बेरोजगारी और प्रमोशन नहीं होने की समस्या से निजात मिलता है.

 (ॐ नम: शिवाय श्रीं प्रसादयति स्वाहा)

4 – भगवान कुबेर मंत्र-

धन प्राप्ति के लिए भगवान कुबेर को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का इस्तेमाल करना चाहिए.

(ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा)

 

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