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मरते समय बालि ने अपने पुत्र से कही थी 3 बाते, जिनके पालन से आपको मिलेगी कष्टों से मुक्ति

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वाल्मीकि द्वारा लिखी गई रामायण हिन्दू धर्म का एक बहुमूल्य ग्रन्थ हैं, जिसमें भगवान विष्णु की मानव रूप में जन्म लेने से लेकर, वनवास जाने और म्रत्यु तक की सभी कथाये मौजूद हैं. लेकिन आज हम रामायण की उस घटना के विषय में आपको बताने जा रहे हैं जब भगवान् मर्यादा पुर्शोतात्तम राम ने अपने बाण से बालि को मार दिया था. श्री राम का बाण लगते हैं बालि घायल होकर धरती पर गिर पड़ा था. लेकिन अपने अंतिम समय में बालि ने राम जी से उसके वध का कराण पूछा था साथ ही में अपने बेटे अंगद को पास बुलाकर 3 बातो का ज्ञान दिया था. यह तिन बाते ऐसी थी जिनका पालन अगर आज का मनुष्य करता हैं तो उसे जीवन में कोई परेशानी नहीं होती, तो आइये जानते हैं बालि ने अपने बेटे अंगद से कौन सी तीन बाते कही थी.

 

अंगद से कही थी तीन बाते

बालि ने अपने अंतिम समय में अपने पुत्र अंगद को अपने पास बुलाया और उसे एक श्लोक के मध्यम से तीन बाते कही थी, ये बाते थी, देश काल और परिस्थितियों को भलीं भांति समझो. किसके साथ कब, कहाँ और केसा व्यहवार करना ही इसे भी अच्छी तरह से समझो. वहीं पसंद नापसंद, सुख-दुःख को सहन करना सीखो और अपना सम्पूर्ण जीवन क्षमा के साथ जीना चाहिए.  अपनी इन ही तीन बातो के साथ में बालि ने अपने पुत्र अंगद को सुग्रीव के साथ में रहने को कहा था.

 

बालि की ये तीन बाते आज के मनुष्य के लिए हैं फायदेमंद

बालि ने अपने अंतिम समय में अपने पुत्र को बुलाकर जो बाते कही थी अगर आज का उन तीनो बातो का पालन करता है तो वहा संसार में कभी भी दुखी नहीं रहता. जैसा कि बालि ने अपनी पहली बात में कहा था कि हर परिस्थिति को सही तरह से समझो, अगर मनुष्य परिस्थिति के अनुसार फैसले लेता हैं तो उसे परेशानी नहीं होती. बालि की दूसरी बात के अनुसार अगर आज का मनुष्य यह समझ जाये कि किस व्यक्ति के साथ कैसा व्यहवार करना हैं तो उसे कभी कष्टों का सामना नहीं करना पड़ेगा. वहीं अगर बालि की तीसरी बात पर ध्यान दिया जाए तो अगर व्यक्ति सुख और दुःख जैसी परिस्थितियों को सही सहन करना सीख जाए और दुसरो को माफ़ करना सीख ले तो उसे जीवन में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आएगी.

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