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मृत्यु शैया पर लेटे हुए भीष्म पितामह ने स्त्रियों को लेकर बताई थी यह गुप्त बातें

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सनातन संस्कृति में मातृशक्ति को अत्यंत आदरणीय माना जाता है. आध्यात्मिक व सामाजिक ग्रंथों में ऋषियों ने कहा है कि महिलाओं का सम्मान करना चाहिए जिस राष्ट्र में महिलाओं का सम्मान नहीं होता उसका पतन हो जाता है. महाभारत और रामायण में भी बताया गया है कि जब भी किसी ने स्त्री का अपमान किया है, उसका निश्चित ही विनाश हुआ है. महाभारत में भी बताया गया है कि कैसे जब द्रौपदी का चीरहरण हुआ तो सभा में मौजूद सभी लोग उनका अपमान होते हुए देखते रहे लेकिन किसी ने इस घटनाक्रम को रोकने की कोशिश नहीं की. तब द्रौपदी ने क्रोधित होकर कौरवों को श्राप दिया और आखिर में कौरवों का अंत हो गया. जब महाभारत में पितामह भीष्म मृत्यु की शैया पर लेटे थे, उस समय उन्होंने युधिष्ठिर को महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को लेकर कुछ बातें बताई थी. यह बातें हर पुरुष को जरुर जानना चाहिए.

 

 

सम्मान और सुख

भीष्म पितामह ने बताया कि जिस घर में महिला सुखी है, वहां सदैव प्रसन्नता रहती है. वहीँ जिस घर में स्त्री दुखी रहती है, उस घर से लक्ष्मी और देवता भी चले जाते है. ऐसे स्थान पर विवाद कटु वचन दुख हो रहा भावों की प्रबलता होती है.

 

बेटी और बहू का सम्मान

भीष्म ने कहा था कि जिस परिवार में स्वयं की बेटी और बहू का सामन नहीं होता है और उन्हें दुःख दिया जाता है, उस परिवार में कभी खुशियाँ नहीं रहती है. अगर आप चाहते हो कि ससुराल में आपकी बेटी को सम्मान मिले, तो आपको अपनी बहू को भी सम्मान देना चाहिए. परिवार में बेटी हो या बहू उसका सम्मान करना चाहिए जहां इन का सम्मान होता है वह देव भी निवास करते हैं.

 

श्राप-शोक से मुक्ति

भीष्म ने बताया कि मनुष्य को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जो उसके लिए श्राप और शोक लेकर आए. किसी को भी बालक-बालिकाओं, असहाय, प्यासे, भूखे, महिलाओं, गर्भवती, तपस्वी और मरणासन्न लोगों को नहीं सताना चाहिए. ऐसा करने वाले मनुष्य का विनाश निश्चित है. रामायण में भी हमें देखने को मिला है कि कैसे माता सीता ने रावण को श्राप दिया और रावण का विनाश हो गया.

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