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चाणक्य नीति: इस अवस्था में जहर के समान होती है सुंदर स्त्री

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मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चाणक्य को कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में जाना जाता है. वह इतिहास के सबसे विद्वान व्यक्तियों में से एक है. आज सदियाँ गुजर गई, लेकिन उनके द्वारा कहीं गई बातें आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक है, जीतनी उस समय थी. चाणक्य ने उस समय अर्थशास्त्र का निर्माण किया था. कौटिल्य ने सामान्य जन के कल्याण के लिए ऐसी नीतियों का निर्माण किया जो वर्तमान के समय में बहु उपयोगी होती जा रही है. चाणक्य ने उस दौर में बताया था कि कौन सी अवस्था में उपयोगी वस्तु भी जहर जे समान हो जाती है.

 

 

वृद्ध पुरुष के लिए नव यौवन

चाणक्य ने कहा है कि वृद्ध पुरुष के लिए नव यौवन जहर के समान होता है. सुखी वैवाहिक जीवन के लिए जरुरी है कि पति और पत्नी एक-दूसरे से मानसिक और शारीरिक रूप से संतुष्ट हो, लेकिन अगर किसी जवान स्त्री का विवाह किसी वृद्ध व्यक्ति से कर दिया गया तो दोनों एक-दुसरे से संतुष्ट नहीं रह पाएंगे. ऐसे में पत्नी गलत मार्ग पर जा सकती है और पुरुष को समाज में बदनामी का सामना करना पड़ता है.

 

अभ्यास के बिना शास्त्रों का ज्ञान

चाणक्य ने कहा है कि अभ्यास के बिना शास्त्रों का ज्ञान किसी भी व्यक्ति के लिए जहर के समान है. ऐसा व्यक्ति खुद को शास्त्रों का ज्ञाता बताता है, लेकिन बाद में उसे अपमान का सामना करना पड़ता है.

 

 

ख़राब पेट के लिए भोजन

वैसे तो भोजन हमारे जीवन के लिए बहुत जरुरी है, लेकिन चाणक्य ने कहा है कि जिस व्यक्ति का पेट ख़राब होता है उसके लिए भोजन विष के समान होता है. ऐसे व्यक्ति के सामने छप्पन भोग होने पर भी वह विष के समान है. इसलिए जब तक व्यक्ति पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, उसे स्वादिष्ट भोजन से दूर ही रहना चाहिए.

 

गरीब व्यक्ति के लिए समारोह

किसी भी गरीब व्यक्ति के लिए समारोह करना या फिर किसी समारोह में जाना विष के सामान है. क्यों कि समारोह में लोग अच्छे कपडे पहनकर आते है,जिससे गरीब व्यक्ति को अपमान का अहसास होता है. इसलिए स्वाभिमानी गरीब व्यक्ति के लिए समारोह में जाना विषपान के समान होता है.

 

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