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दिन भर भगवान का नाम लेने से भी नही मिलेंगे भगवान, पढ़िए ये रोचक कथा

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कहते हैं कि अगर मन में साफ़  होना जरुरी हैं और अगर मन साफ़ नहीं तो कुछ भी ठीक नहीं होता. यह बात हर जगह लागु होती हैं, चाहे वो भगवान की भक्ति  क्यो न हो. भले ही आप दिन भर भगवान का नाम लेते रहे हो लेकिन अगर आपके मन में कु-विचार चल रहे हो तो आपकी इस भक्ति का कोई फायदा नहीं हैं. अगर आप अपने मन से इन कुविचारो को त्याग देंगे तो आप अपना ध्यान भी पूरी तरह भक्ति और अपने अन्य कामो में लगा सकते हैं. और जब आपके मन से कु-विचार पूरी तरह से चले जायेंगे तो आप किसी भी कार्य को पूरी लगन और ईमानदारी के साथ में कर पाएंगे. ऐसे में आज हम आपको भगवान के ध्यान और मन के कु-विचार से जुडी एक कहानी आपको बताने जा रहे रहे हैं.

 

जब एक साधक ने स्वामी रामकृष्ण को बताई अपनी समस्या

एक समय की बात हैं एक साधक दिन रात भगवान् का नाम लेता रहता था, भजन कीर्तन करता था, और साथ ही में पूरा ध्यान भी लगाता था, लेकिन उसके मन में कुविचार अपने आप उत्पन्न हो जाते थे. ऐसे में वह अपनी समस्या लेकर स्वामी रामकृष्ण के पास गया, साधक ने अपनी समस्या स्वामी रामकृष्ण को बताई. साधक की बात सुनकर स्वामी थोडा मुस्कुराये, और उन्होंने साधक को एक कहानी सुनाई. इस कहानी के माध्यम से न केवल स्वामी जी ने न केवल साधक को एक सही सीख दी बल्कि सभी को धर्म और भगवान की भक्ति के लिए जरुरी मार्ग के विषय में बताया.

 

कथा के माध्यम से स्वामी जी ने दूर की साधक की परेशानी

साधक की समस्या का हल स्वामी जी ने एक कथा के माध्यम से बताया, स्वामी जी ने कथा सुनाते हुए कहा कि एक समय एक आदमी के पास में एक कुत्ता था. यह कुत्ता उस आदमी को जान से भी प्यारा था, वह इस कुत्ते को अपने बच्चे की तरह रखता  था. आदमी कुत्ते को अपने साथ खाना खिलाता,उसे घुमाता बदले में कुत्ता भी आदमी को प्यार करता उसे चाटता और अपना प्यार प्रदर्शित करता. एक दिन एक बूढ़े व्यक्ति ने उस आदमी से कहा कि तुम इस कुत्ते को इतना प्यार करते हो पर यह हैं तो एक जानवर ही देखना किसी दिन यह तुम्हे ही नुकसान पंहुचा देगा. बूढ़े आदमी की यह बात उस व्यक्ति के दिल में घर कर गई और उसने कुत्ते से दुरी बनाना शुरू कर दी. शुरुआत में तो कुत्ता अपने मालिक के साथ वेसा ही व्यहवार करता , लेकिन मालिक की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने से धीरे धीरे कुत्ते ने भी दुरी बढ़ाना शुरू कर दिया. स्वामी जी ने कहा कि तुमने भी भोग विलास की वस्तुओ को अपने समीप रखा है इतनी जल्दी वह तुमसे दूर नहीं जाएगी. सबसे पहले तुम उन भोग-विलास की वस्तुओ को दूर हटाओ फिर ही तुम भगवान की भक्ति पर पूरी तरह ध्यान लगा पाओगे.

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