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भगवान राम ने ही दिया था लक्ष्मण को मृत्युदंड, पढ़िए पूरी कहानी

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कहा जाता है कि जिसका भी इस धरती पर जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु तय है. इंसान क्या स्वयं भगवान को इस धरती को छोड़ कर देवलोक जाना पड़ा था. भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान भगवान श्री राम को भी इस पृथ्वी से वापस जाना पड़ा था. हालाँकि इसके पीछे भी एक बड़ी रोचक कहानी है. जब भी भगवान राम का नाम लिया जाता है तो साथ में भगवान हनुमान और लक्ष्मण का नाम भी लिया जाता है. लक्ष्मण तो शुरू से लेकर आखिर तक श्री राम के साथ खड़े थे, लेकिन क्या आप जानते है कि लक्ष्मण को मृत्युदंड स्वयं भगवान राम ने दिया था. आइये जानते है कि पूरा मामला क्या है.

 

संत बनकर पहुंचे काल देव

पद्म पुराण की कथा के अनुसार एक वृद्ध संत भगवान राम से मिलने के लिए उनके दरबार में पहुंचे. इसके बाद उन्होंने भगवान राम से कहा कि मुझे आपसे अकेले में कुछ बात करनी है. इस पर भगवान राम संत को एक कमरे में ले गए और दरवाजे पर लक्ष्मण को खड़ा रहने को कहा और निर्देश दिया कि किसी को अंदर नहीं आने दिया जाए. साथ ही भगवान राम ने कहा कि अगर किसी ने उनकी बात को भंग करने की कोशिश की तो उसे मृत्यु दंड दिया जाएगा. दरअसल भगवान राम से जो संत मिलने पहुंचे वह काल देव थे. उन्होंने भगवान राम को बताया कि वह विष्णु लोक से आए है और मैं आपको यह बताने आया हूँ कि आपका पृथ्वी पर समय पूरा हो गया है.

 

आ गए दुर्वासा ऋषि

भगवान राम और कालदेव की चर्चा के दौरान दुर्वासा ऋषि वहां पहुंचे. दुर्वासा ऋषि के बारे में कहा जाता है कि वह क्रोधी थे. जब उन्होंने लक्ष्मण से भगवान राम से मिलने की इच्छा प्रकट कि तो लक्ष्मण ने राम की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें मना कर दिया. इसके बाद दुर्वासा ऋषि गुस्सा हो गए और उन्होंने कहा कि अगर मुझे अभी राम से नहीं मिलने दिया गया तो वह उन्हें श्राप दे देंगे. इससे लक्ष्मण घबरा गए और स्वयं अंदर जाकर राम को दुर्वासा ऋषि के बारे में बताया. हालाँकि लक्ष्मण के कारण चर्चा भंग हो गई. लक्ष्मण को देख राम भी धर्म संकट में पड़ गए. कारण कि वो पहले ही कह चुके थे कि चर्चा भंग करने वाले को मृत्यु दण्ड दिया जाएगा.

 

भगवान राम ने सुनाया फैसला

इस पर भगवान राम ने लक्ष्मण को राज्य और देश से बाहर चले जाने का आदेश सुना दिया, क्यों कि उस समय देश से निकाला जाना मृत्युदण्ड के समान ही माना जाता था. भगवान राम का फैसला सुन लक्ष्मण बहुत दुखी हुए. लक्ष्मण अपने भाई से दूर नहीं जाना चाहते थे.

 

लक्ष्मण ने ली समाधी

हालाँकि लक्ष्मण भाई का आदेश नहीं टाल सकते थे, इस कारण वह लक्ष्मण ने अपने कदम सरयू नदी की ओर बढ़ा लिए, वहां पहुंचकर लक्ष्मण ने जल समाधि ली. नदी में पहुंचते ही लक्ष्मण एकाएक अनंत शेष अवतार में बदल गए. इस तरह लक्ष्मण विष्णु लोक पहुंच गए.

 

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