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प्राचीनकाल में ये राजा खुले में ही बना लेते थे संबंध, विश्वास नही तो आप खुद ही पड़ लीजिए !

शारीरिक संबंध बनाना हर व्यक्ति को जरुरी होता है। और सभी यह जानते है कि शारीरिक संबंध बनाने पर हम सामान्य तरीके से हर किसी से बात शेयर भी नहीं करते है बात न करने से यह नहीं है कि आप खुले विचारों वाले नहीं बल्कि यह बात गुप्त होती है जो लोगों से शेयर करने में इंसान को शर्म लगती है। यदि हम बात  करे अपने पूर्वजों की तो वे कुछ ज्यादा ही खुले विचार वाले थे जो किसी भी स्त्री से शारीरिक संबंध बनाने में रत्तीभर भी नहीं शरमाते थे। शायद यह बात को आपको पच नहीं रही होगी लेकिन जनाब यह बात बिलकुल सत्य है। दरअसल, ‘महाभारत’ और ‘ऋगवेद’ जैसे ग्रंथों में उस दौर में संबंध बनाने को लेकर होने वाली बातों का जिक्र मिलता है। यदि पुरुष को कोई स्त्री पसंद आ जाती है और उस स्त्री को भी पुरुष पसंद आ जाता था तो वे आपसी सहमती से दोनों के दुसरे के साथ शरीक संबंध बना लेते थे। साथ ही शादीशुदा जोड़े भी समान रूप से इसका आनंद लेते थे।

हम सभी जानते है किफ भारत भूमि कामसूत्र की जननी है। इसका प्रत्यक्ष सबूत है भारत में खजुराहों और कोणार्क मंदिर में लगी मूर्तियां। आज हम आपके लिए कुछ ऐसे ही उदाहरण लेकर आये जो जिक्र हमने ऊपर की पंक्तियों में किया है। तो देर किस बात की आइये जानते है कौन थे वो प्राचीन काल के लोग जिन्होंने किसी भी स्त्री के साथ शारीरिक  संबंध खुलें में लोगों के सामने बनाएं।

ऋषि ने बनाए संबंध

महाभारत के आदि पर्व के चैप्टर 63 के अनुसार ऋषि पराशर मछुआरे की बेटी सत्यवती मत्स्यगंधा की सुंदरता पर मोहित हो गए थे। इस दौरान उन्होंने एक साधारण से मछुआरे की बेटी के साथ खुले में संबंध बनाए थें। सत्यवती और ऋषि का एक बच्चा भी हो गया था लेकिन कारणवश सत्यवती ने के राजा से शादी कर ली थी।

खेल-खेल में बना लेते थे शारीरिक  संबंध

बाजीराब के समय भी खुले में और खेल-खेल में लोग शारीरिक संबंध बना लेते थे। उस समय जब भी कुछ लोग खेल के लिए किसी स्थान पर एकत्र हो जाते थे तो उनके बीच एक खेफ्ल खेला जाता था इसमें जो महिला अपने कपड़े उतारकर बीच में रखती थी। फिर जो पुरुष जिस महिला के कपड़े उठाता था वो उसके साथ संबंध बनाता था। यह प्रक्रिया तब तक चलती थी जब तक हर महिला, हर पुरुष से संबंध न बना ले।