Religious

जब विष्णु जी हुए माता लक्ष्मी से नाराज, बना दिया किसान के घर की नौकरानी

Religious :-

 

कहते है कि कर्मो की सजा भगवान् को भी भोगनी पढ़ती हैं,ऐसी ही एक कथा आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं, जिसके अनुसार एक बार भगवान् श्री विष्णु ने धरती पर जाने का निर्णय किया. जिसपर माता लक्ष्मी ने भी साथ चलने की इच्छा जताई, लक्ष्मी जी कि बात मानते हुए श्री विष्णु ने उनसे एक वचन लिया और कहा कि हे प्रिये में तुम्हे एक ही शर्त पर अपने साथ ले जाऊँगा अगर तुम मुझे वचन दोगी की तुम धरती पर पहुंचकर उत्तर दिशा की तरफ बिलकुल नहीं देखोगी. भगवान् विष्णु की इस बात पर लक्ष्मी जी ने हामी भर दी, जब विष्णु जी और लक्ष्मी माता धरती पर पहुंचे तो सुबह का समय था, सूर्य देवता निकल रहे थे और चारो तरफ हरियाली थी. ऐसे में माता लक्ष्मी अपने वचन को भूल गई और उत्तर की दिशा में स्थित एक खेत से जाकर फुल तोड़ लाइ, जब वे वापस लौटी तो विष्णु जी काफी दुखी हुए और उन्होंने लक्ष्मी जी से कहा कि तुमने अपना वचन तौडा हैं साथ ही में फुल की चोरी भी की हैं ऐसे में अब तुम्हे इसकी सजा भुगतनी पड़ेगी. और भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी को उसी किसान के घर नौकरानी बनकर रहने को कहा जिसके खेत से उन्होंने फूल तोडा था.

 

गरीब किसान के घर लक्ष्मी जी बनी नौकरानी

भगवान विष्णु की बात सुनकर लक्ष्मी जी एक बूढी महिला के वेश में उस किसान के घर पहुंची, इस किसान का नाम माधव था, माधव के परिवार में उसकी पत्नी,दो बेटे और तीन बेटियां थी. लक्ष्मी जी ने माधव के घर जाकर उससे कहा कि वह काफी दिनो से भूखी हैं, और उन्हें काम चाहिए. माधव ने भी दया करते हुए लक्ष्मी जी को अपने यहाँ नौकरी पर रख लिया, ऐसे में अब लक्ष्मी जी माधव के परिवार के साथ में खेत पर काम करती और घर का काम भी करती. दिन बितते गए माधव को खेती में बहुत फायदा हुआ, दिन प्रतिदिन उसकी तरक्की होने लगी और अब उसने अपने परिवार के लिए एक नया मकान बनवा लिया. एक दिन माधव के मन में विचार आया कि यह सब उस बूढी औरत के आने के बाद ही हुआ हैं.

 

जब माधव को पता चली सच्चाई

एक दिन माधव अपने घर लौटा तो उसने दीवार पर लक्ष्मी जी की तस्वीर देखी जो हुबहू उस बूढी महिला की तरह लग रही थी, यह देखकर माधव सब कुछ समझ गया और उसने अपने परिवार को यह बात बताई. माधव अपने परिवार के साथ उस बूढी महिला को देखने के लिए बाहर आया, तब वह महिला खेतो में काम कर रही थी. माधव और उसके परिवार ने लक्ष्मी जी की और हाथ जोड़कर कहाँ हमें माफ़ कर दे मां, हम आपको पहचान नही सके और अनजाने में आपसे घर का काम करवाया. तब लक्ष्मी जी ने कहा कोई बात नहीं माधव, तुम एक अच्छे इंसान हो, इतनी गरीबी के बाद भी तुमने मुझे घर में रहने दिया और खाने को भोजन दिया. मैं तुमसे प्रसन्न हूँ और तुम्हे वरदान देती हूँ कि तुम्हारे घर में कभी धन और खुशियों की कमी नही आयेगी, ऐसा कहते हुए लक्ष्मी जी एक बार फिर वैकुंठ धाम लोट गई.

मजेदार खबरों के लिए हमें फॉलो करे..

 

ये भी पढ़े

कभी आपने सोचा है, भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु कैसे हुई थी ?

क्या आपको पता है ‘नारियल’ का जन्म कैसे हुआ ?

इन मंत्रों का जाप करने से कोई भी आदमी बन सकता है करोड़पति !