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क्या आप जानते है एक चुटकी सिन्दूर का महत्व, यह है वैज्ञानिक कारण

“एक चुटकी सिंदूर की कीमत तुम क्या जानों रमेश बाबू, ईश्वर का आशीर्वाद होता है एक चुटकी सिंदूर, सुहागन के सर का ताज होता है एक चुटकी सिंदूर, हर औरत का ख्वाब होता है एक चुटकी सिंदूर.” आपको बॉलीवुड फिल्म ओम शांति ओम का यह डायलॉग तो याद ही होगा. अब एक चुटकी की सिंदूर की कीमत तो हम नहीं जानते, लेकिन एक चुटकी सिन्दूर का महत्व हम जरुर जानते है. भारत में सिंदूर एक सुहागन औरत की निशानी होती है. शादीशुदा औरतें सिंदूर क्यों लगाती है और इसके क्या फायदे है इसके पीछे कई धार्मिक कारण है, लेकिन आज हम आपको सिंदूर लगाने के पीछे क्या वैज्ञानिक फायदे है वह बताने जा रहे है.

सिंदूर का महत्व

हिन्दू धर्म में जब भी किसी की शादी होती है तो दूल्हा अपनी होने वाली दुल्हन की मांग भरता है. इसके बाद दुल्हन हर रोज अपनी मांग में सिंदूर लगाती है. यह एक सुहागन महिला की निशानी होती है. सिंदूर सोलह श्रंगार का एक महत्वपूर्ण अंग है. मात्र सिंदूर भर भरने से किसी भी स्त्री के सौन्दर्य में वृद्धि हो जाती है. एक स्त्री कितनी भी सजी सवरी क्यों ना हो, कहीं कुछ सुना सुना या अधुरा सा लगता है, लेकिन मात्र एक चिटुकी भर सिन्दूर उसकी ख़ूबसूरती को और बढ़ा देती है.

वैज्ञानिक फायदें

दरअसल जिस स्थान पर भरा जाता है, वहां मस्तिष्क की एक महत्वपूर्ण ग्रंथी होती है जिसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं. यह अत्यंत संवेदनशील होती है. यह कपाल के अंत से लेकर सर के मध्य तक होती है. यहाँ सिन्दूर लगाने के पीछे कारण यह है कि सिन्दूर में पारा नाम की धातु होती है, जो ब्रह्मरंध्र के लिए औषधि का काम करता है. वहीँ सिन्दूर महिला के सर को ठंडा रखता है, ताकि शादी के बाद गृहस्थी का दबाव महिला पर आता है तो उसे तनाव महसूस ना हो. पारा एकमात्र ऐसी धातु है जो तरल रूप में रहती है. यह मष्तिष्क के लिए लाभकारी है, यही कारण है जो सिन्दूर को मांग में भरा जाता है. यह परंपरा हमारे पूर्वजों और ऋषि मह्रशिओं ने काफी शोध के बाद ही शुरू की थी.