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दिन में 3 बार अपना रंग बदलता है शिवलिंग, पुरातत्व विभाग को भी नहीं मिला जवाब

भारत को देवों की भूमि कहा जाता है। हमारे देश में कई मंदिर ऐसे हैं जो आज भी लोगों के लिए रहस्य बने हुए है। यह मंदिर अपनी सुंदरता के साथ साथ अपने रहस्य के लिए भी जाने जाते हैं, आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर की मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका रहस्य आज तक किसी को पता नहीं चला है। इस मंदिर में स्थित शिवलिंग दिन में 3 बार अपना रंग बदलता है। यह मंदिर राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित है। आइए जानते हैं इस चमत्कारिक मंदिर के बारे में कुछ और बातें…

धौलपुर जिले के चंबल नदी पर स्थित इस अचलेश्वर महादेव मंदिर में मौजूद शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। इस शिवलिंग का रंग सुबह लाल, दोपहर में केसरिया और शाम को सावला हो जाता है। हालांकि ऐसा क्यों होता है इसका रहस्य आज तक कोई समझ नहीं पाया है। विज्ञान भी इस मामले को अब तक समझा नहीं पाया है। इसके अलावा शिवलिंग का छोर क्या है यह भी अभी तक कोई पता नहीं लगा पाया है। शिवलिंग का रंग दिन में तीन बार क्यों बदलता है, इसकी जांच करने के लिए पुरातत्व विभाग की टीम एक बार मंदिर आई थी, लेकिन उन्हें भी इस रहस्य का हल नहीं मिला।

शिवलिंग का रंग बदलने के अलावा इस मंदिर से एक रहस्य और भी जुड़ा है। रहस्य यह है कि मंदिर में शिवलिंग पर जो जल चढ़ाया जाता है, वह कहां जाता है। इसकी जानकारी भी अभी तक किसी को नहीं है। पुरातत्व विभाग की टीम भी यह समझ नहीं पाई है कि जल कहा जाता है। शिवलिंग के नीचे बने प्राकृतिक पाताल खड्डे में कितना भी जल डालो, वह भरता नहीं है। यह मंदिर करीब 2500 साल पुराना है। इस मंदिर में पंच धातु से बनी नंदी की एक विशाल प्रतिमा है, जिसका वजन करीब 4 टन है।

बीहड़ों में स्थित इस मंदिर तक जाने का रास्ता बहुत ही पथरीला है, यही कारण है कि यहां बहुत कम लोग आते हैं। माउंट आबू के पहाड़ों में स्थित यह मंदिर अपने आप में बहुत खूबसूरत हैं। इस मंदिर से आप हिल स्टेशन माउंट आबू भी जा सकते हैं। घूमने के लिए के लिए यह बहुत ही खूबसूरत जगह है। वैसे तो भगवान शिव के बारे में कहा जाता है कि वह किसी को निराश नहीं करते, लेकिन इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां विशेष रूप से कुंवारों की मान्यता जल्द पूरी होती हैं।