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सबसे बड़ी काबिलियत तो नियत होती है, हुनर वाले तो अक्सर ज़िन्दगी को कोसते हैं

मैं ग्यारवी क्लास में फेल हो गया था और किसी तरह फाइनल टर्म में नंबर खींच खींच कर मैंने क्लास पास करी. वैसे ऐसा नहीं था की मैं पढ़ने में कमज़ोर था पर ग्यारवी आमतौर पे वो क्लास होती है जिसमे newton के लॉ समझते समझते हमे किसी से इश्क़ हो जाता है और जब वो हमे फ्रेंडज़ोन कर देती है तो हमे ये समझ में आ जाता है की ज़िन्दगी में ज़रूरी नहीं हर चीज़ का इक्वल एंड अपोजिट रिएक्शन हो.लगभग पूरा इलेवेंथ मैंने धड़कन के सुनील शेट्टी की तरह निकाल दिया,मेरी उम्मीदें बढ़ती रहीं,मेरा गुस्सा बढ़ता रहा बस नंबर कम होते चले गए.किसी तरह इलेवेंथ ख़तम हुआ और जब पापा रिपोर्ट कार्ड लेने पहुंचे तो मेरी टीचर ने सबके सामने पापा से कह दिया,आपका बेटा आपका नाम खराब कर रहा है.मैं इंतज़ार करता रहा की पापा डाटेंगे,चिल्लाएंगे पर उन्होंने मुझसे कुछ कहा ही नहीं,गुस्से में घूरा भी नहीं और शायद यहीं बात मुझे बुरी लगने लगी.अगले कुछ दिनों तक मैं पापा से आखँ तक नहीं मिला पाया,क्या ही मिलाता, बस रोज़ अकेले बैठ के ये सोचता था की कोई इतनी मेहनत करके मेरे लिए पच्चीस हज़ार कोचिंग की फीस भरता है और बदले में मैं इस काबिल भी नहीं की उनसे आखँ मिला कर बात कर सकूँ.

खैर बारहवीं शुरू हुई और यहाँ से मेरा सिर्फ एक ही गोल था,वो सब कुछ ठीक करना जो मैंने एक साल में खराब किया था,मुश्किल था पर वो गंगाजल फिल्म का डायलाग है न,सर हम मानते हैं की हमसे गलती हुआ है,पर हम गलत आदमी नहीं है.उस एक साल मुझे अपने कल के अलावा कुछ भी नहीं दिखता था,पुरे एक साल मैंने कोई पिक्चर नहीं देखी,कहीं घूमने नहीं गया बस एक कमरे में खुद से लड़ता रहता था इस उम्मीद में एक दिन इसी कमरे में बैठ कर ख़ुशी से रोऊँगा.स्कूल में थोड़े नंबर भी सुधरे पर लोगों ने उम्मीद करना बंद कर दिया था,उम्मीदें तो उन बच्चों से थी जो हर बार नाइंटी परसेंट से ज़्यादा मार्क्स लाते थे.बहरहाल पापा उसके बाद कभी मेरे स्कूल नहीं आये,आते भी क्या और देखते ही देखते ही एक साल बीत गया.बोर्ड्स का रिजल्ट आने वाला था सब परेशान थे,क्योंकि सबको पता था की बोर्ड्स के नंबर से ही तो आने वाल घर चलता है.दिन में रिजल्ट आ गया और जैसा की मेरे रिश्तेदारों को उम्मीद थी मेरे इस बार भी नाइंटी नहीं आये.स्कूल पहुंचे तो पता चला उस लड़की ने टॉप कर दिया है और मैं लाइन में खड़े होकर उन सबके लिए तालियां बजाने लगा जिनके नाइंटी से ज़्यादा आये थे,सब बहुत खुश थे,अगले दो दिन के लिए वो अपने मोहल्ले में सेलिब्रिटी जो बनने वाले थे.

कुछ दिनों बाद IIT का रिजल्ट आया,मेरी रैंक एक्सटेंडेड मेरिट लिस्ट में आयी, मैं सोच ही रहा था की अब क्या की तभी दूसरे सबसे बड़े एग्जाम का रिजल्ट आ गया.मेरे घर में इंटरनेट नहीं था तो मैंने एक दोस्त को फ़ोन किया रिजल्ट चैक करने के लिए,ये वो दौर था जब इंटरनेट कनेक्ट करने में पांच मिनट लगता था और जैसे हर एक मिनट के साथ मेरी धड़कने बढ़ती चली जा रहीं थी.जब थोड़े टाइम के बाद उसने कुछ नहीं कहा तो मैंने धीरे से पुछा,नहीं हुआ क्या,तो उसने धीरे से कहा,तुम्हारा NIT में हो गया.

मैं बैठा रहा कुछ देर उसी कुर्सी पे,और सोचता रहा उन दो सालों के बारे में,मतलब कितना अजीब था न,कभी मैं दूसरों के पीछे भागते भागते हारा था और आज मैं खुद को ही हरा कर जीत गया. मैं स्कूल गया तो पता चला की मेरे स्कूल में मेरी सबसे अच्छी रैंक आयी है,धीरे धीरे सबके फ़ोन आने लगे,जिसमे से एक उस लड़की का था और उसके इस फ़ोन के साथ मुझे ये भी समझ में आ गया की newton का थर्ड लॉ इश्क़ में तभी अप्लाई होता है जब आप अपनी काबिलियत साबित कर देतें हैं.सब खुश थे, मेरे रिश्तेदारों के अलावा पर अभी एक चीज़ होनी बाकी थी,वो एक चीज़ जिसे मैं शायद कभी नहीं भूल पाऊंगा.

अगली सुबह मेरी बेहेन मुझे जगाने आयी,मैंने पुछा अब क्या हो गया तो उसने कहा अरे बाहर तो आओ.मैंने तुरंत उठ कर बाहर गया,पापा डाइनिंग टेबल पे पेपर पढ़ रहे थे और वो जिस पन्ने को लगातार देख रहे थे उसमे मेरी फोटो आयी थी.पता है उस फोटो की ख़ास बात क्या थी,मेरी फोटो के नीचे मेरा नाम लिखा हुआ था और मेरे नाम के नीचे मेरा पापा का नाम.मैं बस देखता रहा उनके नाम को और फिर उनकी तरफ देखकर धीरे से कहा,पापा ये आपकी वजह से है.उन्होंने उस धुँधली सी तस्वीर को फिर से देखा और बिना कुछ कहें मेरी आखों में ख़ुशी से ऐसे देखने लगे जैसे मेरा नहीं बल्कि उन्ही का सिलेक्शन हुआ है.मैं पेपर लेकर अपने कमरे में चला गया,उसी कुर्सी पे बैठ गया और उस तस्वीर को देखकर पता नहीं मुझे क्या हो गया की मैं हस्ते हस्ते एकदम से रोने लगा,खुश था मैं,शायद अपने से ज़्यादा अपने पापा के लिए.

आठ साल बीत गए हैं,किसी ने आजतक मुझसे बोर्ड्स के नंबर नहीं पूछे,मुझे अच्छे से याद भी नहीं है लेकिन अगर मैं अपने तजुर्बे से एक बात कहूं तो बस इतना कहूंगा,अच्छे नंबर होना अच्छी बात है पर ज़िन्दगी में आप कहाँ पहुँचते हैं,ये आपके नंबर पे नहीं,आपके ऊपर है,क्योंकि वो कहते हैं न,सबसे बड़ी काबिलियत तो नियत होती है जनाब,अक्सर हुनर वाले ज़िन्दगी को कोसते फिरते हैं….

Source :- Aaghaaz