Religious

रोचक कथा: सुदामा जी क्यों थे गरीब, जानिए उनकी दरिद्रता का कारण

भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की दोस्ती के बारे में तो हम सभी जानते हैं लेकिन यह बात भी किसी से छुपी नहीं है कि भगवान श्री कृष्ण के दोस्त सुदामा अत्यंत गरीब थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी गरीबी के पीछे क्या कारण हैं? क्या कारण है कि सुदामा जी निर्धन रहे? इसके पीछे एक बड़ी रोचक कहानी है. दरअसल उस समय एक बेहद गरीब ब्राह्मणी हुआ करती थी, जो जीवन भिक्षा मांगकर अपना जीवन यापन करती थी. एक समय उस ब्राह्मणी को 5 दिनों तक किसी ने भिक्षा नहीं दी. छठे दिन उसे मात्र दो मुट्ठी चने भिक्षा में मिले. ब्राह्मणी ने उन चनों को भिगाकर रात को सोते समय अपने घर में एक पोटली में बांधकर रख दिया. उसी रात को चोर चोरी करने के इरादे से उस ब्राह्मणी के घर में घुस आए. उन चोरों को जब वहां पोटली मिली तो उन्हें लगा कि इस पोटली में सिक्के होंगे, इसलिए उन्होंने वह पोटली चुरा ली.

ब्राह्मणी ने दिया श्राप

उधर भूख से व्याकुल ब्राह्मणी ने भूखे पेट श्राप दिया कि जो भी शख्स भीगे चने खाएगा वह दरिद्र हो जाएगा. उधर चोरों को जब पोटली में सिक्के नहीं मिले तो उन्होंने वह पोटली फेंक दी. उसके बाद आश्रम की साफ सफाई के दौरान वह पोटली गुरु माता को मिली. जब भगवान कृष्ण और सुदामा जंगल से घास काट कर लौटे तो वह पोटली उन्होंने भगवान श्री कृष्ण और सुदामा को दे दी.

सुदामा ने खाए चने

सुदामा ने वह पोटली अपने हाथ में ली और चनों को देखा उन्हें चनों से जुड़े श्राप के बारे में पता चल गया. इसके बाद सुदामा ने सोचा कि अगर भगवान कृष्ण ने यह चने खा लिए तो सारी सृष्टि गरीब और दरिद्र हो जाएगी. यह सोचकर उन्होंने सारे चने खुद ही खा लिए है और भगवान श्रीकृष्ण को उन्होंने कुछ भी नहीं दिया. यह यही कारण है कि सुदामा जी को ब्राह्मणी का दिया हुआ श्राप लग गया और वह दरिद्र हो गए. हालांकि बाद में भगवान श्री कृष्ण ने उनको दरिद्रता से मुक्त किया.