कवि की कलम से 1 – जाते हुए मांझी का सलाम ले जा

जाते हुए मांझी का सलाम ले जा, जो लगे तो ये पैगाम ले जा। जो न चला तेरा दिमाग दुरुस्त तो २ किलो बादाम ले जा, जाते हुए मांझी का सलाम ले जा।। जो सुबह की किरण बुदबुदाए तुझको, तो सुर्ख अंधेरो में कटी शाम ले जा। जाते हुए मांझी…