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जानिए क्या होता है जौहर, क्यों महिलाएं खुद को कर लेती थी भस्म

इन दिनों देश में संजय लीला भंसाली की फिल्म Padmavati को लेकर काफी विवाद हो रहा है. करणी सेना और अन्य संगठन इस फिल्म का विरोध कर रहे है. विरोध कर रहे लोगों का मानना है कि फिल्म में संजय लीला भंसाली ने तथ्योंक के साथ खिलवाड़ किया है. गौरतलब है कि फिल्म ‘Padmavati’ चितौड़ की रानी पद्मावती पर बनी है. रानी पद्मावती ने दिल्लीि सल्तयनत के शासक अलाउद्दीन खिलजी के सामने समपर्ण करने की जगह जौहर की राह चुनी और अपनी 16000 दासियों के साथ अग्निकुंड में छलांग लगा दी. हालांकि अब ऐसी कोई प्रथा अस्तित्व में नहीं है, लेकिन फिल्म को लेकर हो रहे विवादों कारण लोगों के मन में ऐसी प्रथाओं को लेकर सवाल जरुर खड़े हो रहे है.

 

क्या होता है जौहर

जौहर को राजस्थान में साका के नाम से भी जाना जाता है. जौहर राजपूतो की एक प्रथा है. पहले के समय में जब कभी कोई इस्लामिक सेना राजपूत साम्राज्य पर आक्रमण करतीं और अगर राजपूत सेना को लगता कि इस युद्ध की समाप्ति पर उन्हें हार मिलेगी तो महल में बैठी रानियाँ और दुरी महिलाएं अपनी आबरू बचाने के लिए दुश्मन के हाथ लगने से पहले ही जौहर करती थी. इसके लिए अग्नि का एक बड़ा कुण्ड बनाया जाता था, जिसमे रानियाँ अपनी आत्मरक्षा के लिए खुद को झोंक देती थी.

 

जौहर और सती में फर्क

बता दे कि जौहर प्रथा एक तरह से सती प्रथा का ही रुप है, लेकिन सती प्रथा से अलग है. सती प्रथा में किसी पुरुष के मरने पर उसकी पत्नी को सती होना पड़ता था. कई बार जबरन ही उसे आग में फेंक दिया जाता था. इसके उलट जौहर प्रथा में राजपूत महिलाओं पर किसी तरह का दवाब नही होता था. दरअसल जब इस्लामिक आक्रमणकर्तओं को कोई भी औरत हाथ ना लगती तो वे अन्य हिन्दू जाती की औरतों को अपना शिकार बनाते और जबरन उनका धर्म परिवर्तन भी करवाते थे इस तरह इनकी सेना की जनसंख्याे मे भी बढ़ोतरी होती थी. ऐसे में राजघराने की औरतों और उनकी दासियों के आत्मसम्मान को बचाने के लिये यह प्रथा बनाई गई थी.