Reader's Choice

चालक, स्कूल प्रशासन या सरकार, मासूमों की मौत का कौन जिम्मेदार

Readers Choice

इंदौर के लिए कल की सुबह रोज की तरह सुहानी थी, लेकिन शाम इतनी भयानक होगी किसी ने नहीं सोचा था. इंदौर में बायपास पर दिल्ली पब्लिक स्कूल की बस ट्रक से भीड़ गई. हादसा इतना भीषण था कि उसमे हादसे में 4 स्कूली बच्चों और ड्राईवर की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि हादसा अचानक बस के ब्रेक फेल होने से हुआ. इस हादसे ने पूरे शहर को रुला दिया, जिसने भी इस खबर के बारें में सुना उसकी आँखे नम हो गई. रोज की तरह परिजन कल भी अपने बच्चों का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि अब उनका इंतजार कभी खत्म नहीं होगा. उनके मासूम बच्चे व्यवस्था और स्कूल प्रशासन की लापरवाही की भेट चढ़ गए है. इस हादसे ने इंदौर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश को हिला दिया. हादसे पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीट कर संवेदना व्यक्त की.

 

 

उठते सवाल, कौन जिम्मेदार

इस हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इस हादसे का जिम्मेदार कौन है? क्या इस हादसे को भी कुछ समय बाद भुला दिया जाएगा? क्या इस हादसे के बाद स्कूल प्रशासन बच्चों की जान से खेलना बंद करेंगे? क्या प्रशासन और स्कूल प्रबंधन दोनों ही बच्चों की मौत के जिम्मेदार नहीं है? क्या अब ऐसी कोई व्यवस्था की जाएगी, जिससे ऐसे हादसे दोबारा ना हो? क्या सरकार अब कोई सख्त कदम उठाएगी? क्या ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ अब स्कूल की बसों में सुरक्षा उपकरण की जाँच करेंगे?



स्कूल प्रशासन

हादसे को लेकर स्कूल प्रशासन का कहना है कि हमारी बस अपडेट थी और उसका फिटनेस भी पास था. वहीँ दूसरी ओर यह जानकारी भी सामने आ रही है कि हादसे में मृत ड्राईवर ने बस की खराबी को लेकर बस इंचार्ज से शिकायत की थी और नई बस देने की मांग की थी, लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई. वहीँ कई बच्चों के परिजनों ने भी स्कूल प्रबंधन से बसों के खटारा होने की शिकायत की थी, लेकिन उस ओर भी जिम्मेदार लोगों ने ध्यान नहीं दिया. अगर समय पर ध्यान दिया जाता तो शायद यह हादसा नहीं हुआ होता.

 

 

कैसे दे दिया वाहन को सर्टिफिकेट

इस मामले में एक जानकारी यह भी आ रही है कि RTO करीब 10 दिन पहले ही बस को फिटनेस सर्टिफिकेट दिया था, जबकि जानकारों का मानना है कि बस के स्टेरिंग फेल होने के संकेत 10-12 दिन पहले से ही मिलने लग जाता है. ऐसे में सवाल उठ रहे है कि बस को सर्टिफिकेट कैसे दे दिया?

 

पुरानी बस

शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि बस 15 साल पुरानी थी और मैन्टेनेंस के अभाव में उसका स्टेयरिंग फेल हुआ, जिसके कारण यह हादसा हुआ. बच्चे बताते थे कि बस अक्सर ख़राब हो जाती है, कई बार तो स्टेयरिंग निकलकर निकलकर ड्राईवर के हाथ में आ जाती थी. मामले को लेकर स्कूल प्रबंधन से लिखित शिकायत भी की गई थी. यह भी बताया गया था कि 20 बच्चों की क्षमता वाली बस में 32 बच्चों को ले जाया जाता है.

 

 

ड्राईवर की गलती

जिस बस में हादसा हुआ उसमे स्पीड गवर्नर लगा हुआ ताकि बस की स्पीड 40 किमी से ज्यादा ना हो लेकिन प्रारम्भिक जाँच में सामने आया है कि बस की स्पीड 60 किमी से ज्यादा थी. तेज रफ्तार के कारण ही बस अनियंत्रित होकर दूसरी लेन में जाकर ट्रक से टकरा गई. उसी बस में सफ़र करने वाले एक छात्र ने बताया कि ड्राईवर अंकल बहुत तेज गति से चलाते थे, बच्चे अक्सर उनसे बस को धीरे चलाने की बात कहते रहते थे. यह छात्र कल छुट्टी पर था. बच्चों के माता-पिता ने भी बताया कि कई बार ड्राईवर बस लेकर 10 मिनट पहले आ जाता था.

 

भूलने वाली जनता

अब सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि इस हादसे के बाद जनता क्या करती है? क्या शहर के लोग इसे एक बहुत ही दुखद घटना बताकर कुछ दिनों बाद इसे भूल जाएँगे या फिर किसी क्रांतिकारी परिवर्तन की मांग करेंगे. यह समस्या सिर्फ एक स्कूल की नहीं है. शहर में कई स्कूल बसों की हालत ख़राब है, ऐसे में लोगों को इस मामले में आगे आना होगा और ध्यान देना होगा कि उनके बच्चे जिस स्कूल बस में आ रहे है वह सही हालत में हो. माता-पिता को बच्चों से बात करनी चाहिए कि ड्राईवर बस कैसे चलाता है. सरकार को भी इस मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ ईमानदारी से कार्यवाई करनी चाहिए, वरना ऐसा ना हो आज की शांति कल किसी और बड़ी दुर्घटना का कारण बने.

 

पढ़िए अन्य ख़बरें

इंदौर में दर्दनाक स्कूल बस हादसा, सामने आई दिलदहलाने वाली तस्वीरें

AAP से उठा विश्वास, अब शहीद कुमार के पास बचे है यह 5 विकल्प

2017 में नेताओं ने दिए ऐसे बेतुके बयान, जिन्हें पढ़कर अपना सर पीट लेंगे आप