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पद्मावती: भंसाली की सफाई के बाद भी इन 4 मुद्दों को लेकर है विवाद

इन दिनों देश में संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘Padmavati’ को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. फ़िलहाल फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ा दी गई है, लेकिन यह फिल्म रिलीज होगी या नहीं इसको लेकर भी अभी तक सस्पेंस बना हुआ है. करणी सेना और कई संगठन इस फिल्म का विरोध कर रहे है, वहीँ रानी पद्मावती और रावल रतन सिन्ह के वंशज भी फिल्म पर बैन लगाने की मांग कर रहे है. रानी पद्मावती और रावल रतन सिन्ह के वंशजों का कहना है कि उन्हें तोड-फ़ोड में यकीन नही है, वह इस मामले को बातचीत से सुलझाना चाहते है. आइये जानते है कि क्या ऐसे कारण है, जिस वजह से फिल्म का विरोध हो रहा है.

 

अस्मिता का सवाल

मेवाड़ राजघराने के वंशज अरविंद सिन्ह मेवाड़ का मानना है कि इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए क्यों कि आक्रामकता से सभी पक्षों को नुकसान होगा. यह हार जीत का नहीं बल्कि देश की महिलाओं की अस्मिता का सवाल है.

 

असलियत नहीं दिखा सकते

 

राजघराने के वंशज का कहना है कि संजय लीला भंसाली इस फिल्म को पैसा कमाने के लिए बना रहे है. इस कारण फिल्म के कई सीन को असलियत से हट के दिखाया गया होगा, क्यों कि अगर फिल्म वैसी ही बनी जैसा हकीकत में हुआ था तो यह फिल्म बेहद रुखी लगेगी.

 

तथ्यों से छेड़छाड़

राजघराने के वंशजो का कहना है कि आज कल के बच्चे इतिहास को नहीं पढ़ते बल्कि फिल्म को देखकर उसे सच मान बैठते है. अभी तक फिल्म को लेकर जितना भी देखने को मिला है, उससे यह साफ़ है कि फिल्म ऐतिहासिक तथ्यों पर अधारित नहीं है.

 

पैसा ही सबकुछ नही

इस फिल्म को लेकर अरविंद सिन्ह मेवाड़ के बेटे का कहना है कि, हम इतिहास के साथ छेड़छाड़ बर्दाशत नहीं कर सकते. संजय लीला भंसाली को रानी पद्मावती जैसे पवित्र विषय को मनोरंजन के रूप में नहीं पेश करना चाहिए. क्या यह डायरेक्टर की जिम्मेदाराना वर्कस्टाइल है? उन्होंने सरकार से भी मांग की है कि एंटरटेनमेंट के नाम पर इतिहास, संस्कृति और जन भावनाओं को आहत करने से रोकने के लिए कानून बनाए.