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शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है ?

हर शनिवार सडक के किनारे पर, रेड लाइट पर, मंदिरों के बाहर… सभी जगह आप एक छोटी सी बाल्टी देख सकते हैं, जिसमें शनि देव जी की तस्वीर सरसों के तेल में आधी डूबी हुई दिखती है। लेकिन ऐसा क्यूं? क्योंकि हिन्दू धर्म की एक मान्यता के अनुसार शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए लोग हर शनिवार उन्हें तेल चढ़ाते हैं।

शायद आप भी यह कार्य हर शनिवार मंदिर में जाकर करते हैं या फिर घर के बाहर ही आने वाले बाबा द्वारा लाई हुई बाल्टी में एक सिक्के के साथ तेल अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आपने यह जानने की कोशिश की है कि हम शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाते हैं। हमें ऐसा करना चाहिए यह तो हम जानते हैं, लेकिन इसके पीछे पौराणिक कारण क्या है, यह जान लें…

पुराणों में प्रचलित एक कथा के अनुसार, रामायण काल में एक समय शनि देव को अपने बल और पराक्रम पर घमंड हो गया था। उस काल में भगवान हनुमान के बल और पराक्रम की कीर्ति चारों दिशाओं में फैली हुई थी।

जब शनि देव को भगवान हनुमान के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई तो शनि देव भगवान हनुमान से युद्ध करने के लिए निकल पड़े।

कहते हैं कि जब एक शांत स्थान पर हनुमानजी अपने स्वामी श्रीराम की भक्ति में लीन बैठे थे, तभी वहां शनिदेव आ गए और उन्होंने भगवान हनुमान को युद्ध के लिए ललकारा। परन्तु शनिदेव के क्रोध का कारण हनुमानजी समझ चुके थे, इसलिए उन्होंने युद्ध को स्वीकारने की बजाय शनिदेव को समझाने का प्रयास किया।

लेकिन शनिदेव थे कि मानने को तैयार ही नहीं थे। अंत में भगवान हनुमान भी युद्ध के लिए तैयार हो गए। दोनों के बीच घमासान युद्ध हुआ, जिसके अंत में परिणाम स्वरूप शनि देव की हार हुई।

कहा जाता है कि युद्ध के दौरान हनुमानजी ने शनि देव पर ऐसे तीखे प्रहार किए जिस कारण शनि देव के शरीर पर काफी घाव बन गए। वह पीड़ा उनसे सहन नहीं हो रही थी, इसलिए चिरंजीवी हनुमानजी ने उनके शरीर पर तेल लगाकर उनकी पीड़ा को कम किया।

यही वह कारण है जिसके बाद से शनिदेव को तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। ऐसी मान्यता है कि शनिदेव पर जो भी व्यक्ति तेल चढ़ाता है, उसके जीवन की समस्त परेशानियां दूर हो जाती हैं और धन का अभाव खत्म हो जाता है।