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मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को मंदिर में जाना क्यों निषेध है, जानिए इसका कारण

भारतीय संस्कृति में कई ऐसी रीती-रिवाज है जो किसी को देखकर हम भी अपना लेते है. कई लोग इन रीती-रिवाजों और परंपराओं को गहराई से जानने में संकोच करते तो है लेकिन लोग इस स्वीकार कर लेते है कि ये सारी परंपरा पूर्वजो के समय से चली आ रही है. यदि आप इन परंपराओं को नहीं अपनाते है तो वह अपने पूर्वजों का अपमान होता है. इन रीती-रिवाज में से एक है मासिक धर्म जिसमे महिलाओं को मंदिर में प्रवेश में निषेध माना जाता है. क्या आपने कभी सोचा है कि मासिक धर्म के दिनों में महिलाओं को मंदिर में जाने पर प्रतिबन्ध क्यों लगा देते है ? आज हम बताते है क्या है इसका कारण.

लोग महिलाओं को मानते है अपवित्र मानते है

सभी लोग महिलाओं को हर महीने होने वाला मासिक धर्म की वजह से कुछ समय के लिए अपवित्र  मानते है. इन दिनों में महिलाओं को लोग अपने से घर की कुछ चींजों से दूर रखते है. इस प्रकार की दकियानूसी बात केवल हिन्दू धर्म में ही नहीं बल्कि और भी ऐसे धर्म है जिसमे महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अपवित्रता की नजर से देखते है.

महिलाओं को मंदिरों में न जाने का यह है कारण

महाभारत में जब चौपड़ की प्रतियोगिता में युधिष्ठिर दुर्योधन से पराजित हो गए थे तो अंतिम दाव उन्होंने द्रौपती पर लगाया था. जब दाव में युधिष्ठिर द्रौपदी को भी हार गए तो दुशासन को खोजने के लिए उनके कक्ष गए लेकिन कक्ष में वह नहीं दिखाई दी. दरअसल उस समय द्रौपदी का अनुपस्थित होने का यह कारण था कि क्योंकि उस समय द्रौपदी के मासिक धर्म चल रहे थे जिस वजह से वह पूरा समय एक अलग वस्त्र पहन कर दूसरे कक्ष में रहती थी. इसके मुताबिक पीरियड के समय महिलाओं को अपवित्र माना जाता है.

इंद्रदेव की कहानी

महिलाओं की मासिक धर्म की समस्या की भी कहानी है दरअसल, एक बार ‘गुरु बृहस्पति’, इंद्र देव से बहुत नाराज हो गए थे. इस दौरान देवलोक पर असुरों ने हमला कर दिया और इसी कारण से इंद्र देव को इन्द्रलोक छोड़कर जाना पड़ा. फिर इंद्रदेव अपने अपने लोक बचाने के उद्देश्य से भगवान ब्रह्मा जी के पास गए. इंद्र की यह समस्या सुनकर भगवान ब्रह्मा जी ने इसका हल निकालने उपाय बताया. ब्रह्मा जी कहा कि इंद्र को एक ब्रह्म ज्ञानी की आंतरिक भावना से सेवा करनी चाहिए. और उन्होंने कहा की यदि इस सेवा से वह प्रसन्न हो गए तो अपनी गद्दी वापस हासिल हो जाएगी

गलती से इंद्र देव ने कर दी असुरों की सेवा

असुरों के लिए ज्यादा संबंध रखने वाली ज्ञानी, इंद्रदेव की ओर से जो सेवा की गई वह देवताओं की बजाय असुरो को अर्पित हो गई. लेकिन जब इसकी जानकारी इंद्र को पता लगी तो इन्द्रदेव ने ज्ञानी को मृत्यु दंड दे दिया. इस कारण से इंद्रदेव को ब्रह्म हत्या पाप लग गया था. इससे बचने के उद्देश्य से इंद्रदेव एक वर्ष तक फूल की कली में छिपे रहे.  उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इन्द्रदेव को बचा लिया और इसका एक हल निकाला. भगवान विष्णु ने इस पाप से छुटकारा देने के लिए इंद्रदेव को कहा कि इंद्रदेव को पेड़, भूमि, जल और स्त्री में अपना थोड़ा-थोड़ा पाप बाँटना था, साथ ही उन्हें एक वरदान भी देना था.

पाप के रूप में मिला मासिक धर्म

इन्द्रदेव के पाप से छुटकारा पाने के लिए हर महिला मासिक धर्म की पीड़ा भोगनी पड़ती है. इसके बदले इंद्रदेव को भी यह वरदान मिला कि पुरुषों की तुलना में महिलाएँ काम का आनंद ज्यादा अच्छी तरह ले पाएँगी. इसी कारण से महिलाओं को हर महीनें यह पीड़ा उठानी पड़ती है.